भारत में प्रतिदिन 9 करोड़ लोग भूखे सोने को मजबूर

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Wednesday, November 27, 2013-5:40 PM

पूणे (जुगिन्दर संधू): भारत जैसे देश में रोज़ 9 करोड़ के करीब लोग भूखे सोने के लिए मजबूर होते हैं। जिस संख्या में देश की आबादी बढ़ रही है, उस लिहाज़ के साथ अनाज की पैदावार में विस्तार न हो सका। आर्थिक पक्ष से कमज़ोर लोग अनाज और कई दालें-सब्जियां खरीदने से वंचित रह जाते हैं।

इसलिए देश को ख़ुराक के नज़रिए से समर्थ बनाया जाना चाहिए और साथ ही भारत के किसानों को भी ख़ुशहाल बनाने के लिए कृषि वर्ग को भी लाभकारी का पेशा बनाया जाना चाहिए। इन विचारों का दिखावा पूणे में आयोजित की गई विश्व कृषि मीडिया वर्कशाप को संबोधन करते अलग-अलग माहिरों ने किया। इस वर्कशाप का आयोजन स्विटजऱलैंड की कंपनी सिनजैंटा की तरफ से किया गया था। जिसका कृषि नैटवर्क संसार के अलग-अलग देशों में फैला हुआ है और अब यह भारत के महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और ओर राज्यों में भी अपने नैटवर्क का विस्तार कर रही है।

कंपनी के माहिरों ने बताया कि कंपनी का मुख्य मनोरथ यह है कि बढ़ती आबादी का पेट कैसे भरा जाए। उन्होंने कहा कि इस मकसद के साथ कृषि को मुकम्मल जि़म्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पैदावार में विस्तार होगा तो देश की कृषि अपने आप मज़बूत बन जाएगी। इसके साथ ही सिनजैंटा के खेती माहिर देश में मौजूद स्रोतों का लाभ उठा कर कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने के लिए यतनशील हैं। वर्तमान स्थिति में कपास, धान की फ़सल, मक्का और आलू के क्षेत्र में काम किया जा रहा है।

कंपनी की तरफ से किसानों को इस बात की जानकारी दी जाती है कि फसलों का बीज किस तरह तैयार किया जाए और फसलों को वैज्ञानिक ढंग के साथ किस तरह पाला जाए। सिनजैंटा के माहिरों ने बताया कि जो किसान कंपनी की तरफ से निर्धारित किए गए प्रोग्राम अनुसार फ़सल की काश्त करते हैं, उनके लाभ की पूरी जि़म्मेदारी कंपनी लेती है। इस वर्कशाप में आस्ट्रेलिया, दक्षिणी कोरे, जापान, अमरीका, यूरोप आदि देशों साथ-साथ भारत के अलग-अलग राज्यों से पत्रकार भाग ले रहे हैं। इस वर्कशाप में जहां नयी खेती तकनीकें और फसलों की काश्त के ढंगों बारे जानकारी दी गई। उसके साथ ही मीडिया की टीम को खेतों में ले जाकर नुमायश फसलें भी दिखाईं गई।

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