आदि शंकराचार्य के मूल ग्रन्थों का 325 भाषाओं में होगा अनुवाद

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Wednesday, November 27, 2013-7:22 PM

वाराणसी: सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने वाले तथा उसकी गौरवगाथा लिखने वाले आदि शंकराचार्य के दर्शन और उनके ग्रन्थों का अनुवाद विश्व की 325 भाषाओं में किया जा रहा है। द्वारिका एवं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानन्द सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने इस कार्य को पूरा करने का जिम्मा लिया है। यह अनुवाद अगले पांच वर्षों में दुनिया के समक्ष होगा।

इसका लोकार्पण मई 2018 में आदि शंकराचार्य के जन्मदिवस पर होने वाले समारोह में किया जायेगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने (यूनीवार्ता) से बातचीत करते हुए आज कहा कि अब तक देश में विभिन्न भागों से 400 पाण्डु लिपियां मिल चुकी हैं। इनमें से कुछ पाण्डुलिपियां इंग्लैण्ड और इटली में मौजूद संग्रहालयों से प्राप्त की गयी हैं। मई में आदि शंकराचार्य की जयन्ती बडे पैमाने पर मनायी जायेगी।

उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने न केवल सनातन धर्म को पुनस्र्थापित किया बल्कि देश को एकता के सूत्र में भी बांधा। इस ग्रन्थ का नाम (शंकराचार्य सर्वस्वम्) होगा। इसमें और सुधार के लिए तमाम विद्वानों से सम्पर्क किया जा रहा है। इन ग्रन्थों का पहले चरण में हिन्दी एवं अंग्रेजी में अनुवाद किया जायेगा तथा इसके बाद अन्य भाषाओं में अनुवाद होगा।


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