यूपी में गन्ना किसानों ने बढ़ाई अखिलेश सरकार की मुश्किलें

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Thursday, November 28, 2013-3:02 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाये के भुगतान और अब तक पेराई का काम शुरू न होने की वजह से अखिलेश सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर अब सरकार की घेरेबंदी शुरू कर दी है। गन्ने के मुद्दे को लेकर पश्चिमी उप्र में बने टकराव के हालात पर काबू पाना सरकार के लिए आसान काम नहीं है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के आह्वान पर किसान पूरे प्रदेश में सभी जिला केंद्रों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगहों पर गन्ना किसानों ने जिला मुख्यालय के बाहर ही बेमियादी धरना शुरू कर दिया है और चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाएंगी, यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने चीनी मिल संचालकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो किसान अपने पशुओं को साथ लेकर आंदोलन में उतरेंगे। उन्होंने गन्ना को न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत 225 रुपये क्विंटल की दर से बेचने के बजाय खेत में ही जलाने की बात को दोहराया। गन्ना समस्या को लेकर भाकियू ने भी चक्का जाम का फैसला किया है। राकेश ने बताया कि सरकार ने किसानों की मांगे नहीं मानी तो पांच दिसंबर को चक्का जाम किया जाएगा।

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसान मोर्चा का जिला गन्ना अधिकारियों व मिलों के गेट पर ताला डालो अभियान जारी रहा। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल सिंह तोमर ने आईएएनएस से बातचीत में सरकार पर घुटने टेकने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) नेतृत्व व चीनी मिल मालिकों के रिश्तों की जांच कराने की मांग की। पार्टी ने 29 नवंबर से मंडलायुक्तों के कार्यालयों का घेराव करने का फैसला किया है।

तोमर ने कहा कि पश्चिमी उप्र में बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और हापुड़ सहित सभी जिलों में बेमियादी प्रदर्शन पिछले कई दिनों से चल रहा है। सरकार और मिल मालिकों की सांठ गांठ की वजह से ही गन्ना किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रदेश प्रवक्ता चंद्रमोहन सिंह ने भी स्पष्ट तौर पर कहा कि भाजपा किसानों के मुद्दों पर मजबूती के साथ लड़ेगी और सरकार को किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल (रालोद) ने भी एक दिसंबर से चक्का जाम करने की चेतावनी सरकार को दे दी है। जिला केंद्रों और गन्ना आयुक्त कार्यालय घेरने के बाद अब एक दिसंबर को पश्चिमी उप्र में चक्का जाम की तैयारी है। इस अभियान की कमान खुद राष्ट्रीय महामंत्री जयंत चौधरी संभाले हुए हैं। इस बावत वह गुरुवार को मेरठ में प्रमुख नेताओं से तैयारी बैठक लेंगे। प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने बताया कि किसानों का हक मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। चौहान ने कहा, एक दिसंबर को गन्ना उत्पादन वाले क्षेत्रों में 12 बजे से लेकर तीन बजे तक चक्का जाम किया जाएगा। इसमें सूबे के सभी विधायक और पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।

उन्होंने बताया कि हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, फैजाबाद, गोंडा, कुशीनगर और पश्चिमी उप्र के इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उप्र में गन्ने का पेराई सत्र अभी तक शुरू नहीं हो पाया है और सरकार की ओर से पिछला बकाया लगभग 2300 करोड़ रुपये का भुगतान भी अभी तक किसानों को नहीं हो पाया है। इससे आहत किसानों ने अब जिला कार्यालयों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

उधर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देशों के बावजूद भी चीनी मिल मालिक मिलें चालू नहीं कर रहे हैं। सरकार हालांकि, मिल मालिकों और किसानों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर इस मामले को सुलझाने में जुटी है लेकिन अभी तक उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।
 


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