‘आसाराम है संत समाज के लिए कंलक’

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Friday, November 29, 2013-9:15 AM

वाराणसी: श्रीभूमा शक्तिपीठम के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी अच्युतानन्द तीर्थ ने कहा है कि आसाराम बापू को संत कहना संत समाज का सबसे बड़ा अपमान है और वह इस समाज के कलंक हैं। स्वामी अच्युतानन्द ने यहां पत्रकारों से कहा कि आसाराम एक कथावाचक थे न कि संत और स्वार्थी तत्वों ने उन्हें सन्त कहकर महिमामण्डित किया। देश में आई शंकराचार्यों की बाढ़ पर उन्होंने कहा कि गेरुआ वस्त्र धारण करने से ही कोई संत नहीं हो जाता और नकली संतों एवं फर्जी शंकराचार्यों के निर्माण में सभी दोषी हैं।

कांची कामकोटि के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती एवं उनके शिष्य विजयेन्द्र सरस्वती को बहुचर्चित शंकररमण हत्याकाण्ड में अदालत द्वारा बरी किए जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि कुछ कूटनीतिक कारणों से उन पर आरोप लगे थे। शंकराचार्य पहले भी निर्दोष थे और आज भी निर्दोष हैं। शंकराचार्य का व्यक्तित्व हमेशा साफसुथरा रहा है और रहेगा। शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को अदालत द्वारा बरी किये जाने पर हनुमानघाट स्थित शंकराचार्य मठ में खुशी का वातारण है और लोग मिठाइयां बांटकर खुशियां मना रहे हैं।


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