गांव और अवैध कॉलोनियों की जनता करेगी अहम फैसला

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Friday, November 29, 2013-3:05 PM

नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): बाहरी दिल्ली की विधानसभा क्षेत्रों की हार-जीत में गांव,अनधिकृत और पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाली पब्लिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसमें तीन सुरक्षित सीटें भी हैं। शायद इसीलिए उत्तर-पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट को आरक्षित श्रेणी में डाला गया है। इसमें रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में आने वाली बहुत बड़ी डीडीए कॉलोनी भी है।

बाकी  विधानसभा सीटों पर वही प्रत्याशी विजयी होगा,जिसकी पकड़ गांवों,अनधिकृत कॉलोनियों और जे.जे. कलस्टर में होगी। नरेला विधानसभा सीट के अंतर्गत करीब 35 गांव आते हैं। यहां करीब 6 अनधिकृत कॉलोनियां और 5 जे.जे. कलस्टर हैं। करीब 2 लाख मतदाता वाले इस क्षेत्र में डीडीए की कोई कॉलोनी नहीं है।

वहीं, रिठाला विधानसभा क्षेत्र में रोहिणी के कुछ सैक्टर भी शामिल हैं,लेकिन यहां करीब एक दर्जन बड़ी अनधिकृत कॉलोनियां हैं। इस विधानसभा का नाम क्षेत्र के रिठाला गांव पर रखा गया है जो यहां का एकमात्र गांव है। यहां मतदाताओं की संख्या 2 लाख से ऊपर है।
बवाना विधानसभा सीट सुरक्षित है। करीब डेढ़ लाख वोटरों वाली इस सीट में करीब 14 गांव और 40 से अधिक अनधिकृत और जे.जे. कलस्टर हैं।

इस विधानसभा में रोहिणी के तीन सेक्टर आते हैं,लेकिन गांव और अनधिकृत कॉलोनियों के मतदाता ही प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यहां की किराड़ी विधानसभा ऐसी सीट है, जिसमें मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं। यहां 3 बड़े गांव हैं और करीब 100 छोटी-बड़ी अनधिकृत कॉलोनियां है। करीब पौने दो लाख मतदाता वाली इस सीट को पूरी तरह अनधिकृत कॉलोनियों की विधानसभा भी कहा जा सकता है।

मुंडका विधानसभा में भी मतदाताओं की संख्या करीब 2 लाख है।यहां करीब 20 गांव और 60 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां हैं। यहां की मंगोलपुरी और सुल्तानपुरी माजरा की सीटें भी सुरक्षित हैं। विशेष बात यह है कि इन दोनों विधानसभाओं के नाम यहां की बड़ी पुनर्वास कॉलोनियों के नाम पर रखे गए हैं। यहां पर किसी भी प्रत्याशी के हार-जीत का फैसला दो बड़ी कॉलोनियों के मतदाता ही करते हैं। बादली विधानसभा में कई गांव व कई अनधिकृत कॉलोनियों हैं।


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