नारेबाजी करने वालों का भी टोटा

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Friday, November 29, 2013-3:28 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा ): चुनावी समर में नेताओं के साथ नारेबाजी करने वाले लोगों का भी टोटा पडऩा शुरू हो गया है। दरअसल सभी पार्टियां के लोग भीड़ जुटाने के लिए हर तरह के टोटके अपना रहे हैं। ऐसे में 2-4 समर्थकों के साथ प्रचार करने निकले प्रत्याशी के हौसले खुद पस्त हो जाते हैं। इसके लिए एक्सपोर्ट फैक्टरियों में काम करने वाले कर्मचारियों तक को मुहैया क राया जा रहा है।

इन दिनों आपके गली-मोहल्ले में यदि नेताजी जिन्दाबाद के नारे लगाने वालों के चेहरे अजनबी से लगें,  तो हैरान होने की कोई बात नहीं है। क्योंकि ये सभी नेताजी के जुगाड़ के आधार पर  जुटाए गये समर्थक हो सकते हैं। चुनाव प्रचार में भीड़ का बोलबाला करने के लिए नेताओं के पास आजकल लोगों की कमी चल रही है। इस कमी को पाटने और नारे लगाने के लिए लोगों ने एक्सपोर्ट फै क्टरियों में काम करने वाली महिलाओं तक का इंतजाम कर लिया है।

नेताओं के टेंपो सुबह से ही भीड़ जुटाकर सभी को पहले एक स्थान पर ले जाते हैं। फिर तय कार्यक्रम के अनुसार पद यात्रा में उन्हें चलाया जाता है। इन दिनों दक्षिणी दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र सहित अनेक इलाकों से महिलाओं को बुलाया गया है। यही नहीं फरीदाबाद के एक्सपोर्ट हाउस तक से मजदूर भाड़े पर बुलाए जा रहे हैं। इन सभी को रोजाना नारेबाजी करने के खासी पगार दी जा रही है। इसके साथ ही उनके लिए चाय और खाने का बंदोबस्त भी रहता है।

मजे की बात यह है कि नारे लगाने वाली महिलाएं एक जगह से दूसरी जगह भी हाथ-पांव मार रही हैं, मतलब यदि उन्हें साथ र खने वाला नेता कम मेहनताना देता है, तो वह झट से अगले दिन दूसरे नेता के खेमे में पहुंच जाती हैं। काम वाली भी गायब: चर्चा है कि दक्षिणी दिल्ली के पॉश इलाकों में घरों में काम करने वाली आया भी इन दिनों छुट्टी पर चली गई हैं। ये अपने पैतृक गांव नहीं गईं हैं, बल्कि नेताओं के नारे लगाकर रकम कमा रही हैं।


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