प्रशासनिक सेवाओं के नजरिये में बदलाव जरूरी: प्रणव

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Friday, November 29, 2013-4:49 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने प्रशासनिक सेवाओं के नजरिये में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए आज कहा कि निष्पक्ष और गैर राजनीतिक नौकरशाही आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन में अहम भूमिका अदा करती है। मुखर्जी ने यहां कहा कि आर्थिक विकास की सफलता हमारे लोक प्रशासन की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। लोग ऐसा पारदर्शी और पेशेवर प्रशासन चाहते हैं जो उनकी जरुरतों का प्रभावी ढंग से ख्याल रख सके और उनकी शिकायतों को त्वरित ढंग से निपटारा करे।

 

लोग चाहते हैं कि कल्याणकारी उपायों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक निर्बाध रूप से पहुंचे। इसके लिए सुशासन की जरुरत है। राष्ट्रपति संघ लोक सेवा आयोग 87वें स्थापना दिवस पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आॢथक विकास. समानता तथा विभिन्न वर्गों की सामाजिक भागेदारी के लिये सुशासन जरुरी है। निष्पक्ष और गैर राजनीति नौकरशाही सुशासन को मजबूत करती है तथा आर्थिक विकास और सामाजिक बदलाव में अहम भूमिका अदा करती है।

 

मुखर्जी ने कहा कि देश में सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है क्योंकि सामाजिक कल्याण और समावेशी विकास के लिए यह बहुत जरूरी है। सुशासन के अभाव में समाज में कई तरह के विकृतियां फैलती है। उन्होंने कहा कि कानून के राज, पारदर्शिता, जवाबदेही, समानता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा से लोगों की हिस्सेदारी के लिए सुशासन बहुत जरुरी है।

 

मुखर्जी ने कहा कि देश के प्रशासन को इसी आधार पर चलना चाहिए। इसके लिए प्रशासनिक सेवाओं के नजरिये में बदलाव लाना जरूरी है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी और आयोग के अध्यक्ष डी.पी. अग्रवाल इस अवसर पर उपस्थित थे।


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