हत्या मामले में पहले ली जमानत, फिर की हत्या

  • हत्या मामले में पहले ली जमानत, फिर की हत्या
You Are HereNational
Friday, November 29, 2013-11:47 PM

नई दिल्ली(मनीषा खत्री): हत्या के मामले में सजा काट रहा एक अभियुक्त अंतरिम जमानत पर बाहर आया और फिर फरार हो गया। इसी दौरान उसने एक आपराधिक मामले के चश्मदीद गवाह की हत्या कर दी।

इस मामले में उसे निचली अदालत ने 20 साल कैद की सजा दी जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी ठीक ठहराया है। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर की खंडपीठ ने अभियुक्त प्रेमचंद की दी गई सजा को उचित ठहराते हुए कहा कि अभियुक्त की उस दलील में कोई दम नहीं है कि वह तो अपने पुराने मामले में कोर्ट में सरैंडर करने आया था और उसे फंसा दिया गया।

खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 1988 के उस हत्या के मामले में अभियुक्त को पहले ही सजा हो चुकी है और उसे अंतरिम जमानत दी गई थी। जिसके अनुसार उसे 22 फरवरी 2000 को सरैंडर करना था परंतु वह फरार हो गया और उसे भगौड़ा घोषित कर दिया गया।

निचली अदालत ने अभियुक्त प्रेम चंद को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा देते हुए कहा था कि कम से कम बीस साल की सजा काटने के बाद ही उसकी पैरोल पर विचार किया जाए। साथ ही उस पर पचास हजार रुपए जुर्माना भी किया था। इसी आदेश को उसने चुनौती दी थी।

मृतक राजेश यादव जहांगीर पुरी थाने में दर्ज एक मामले में चश्मदीद गवाह था। उस मामले में महेंद्र पहलवान व अन्य चार आरोपी थे। इसीलिए उस पर गवाही न देने का दबाव ड़ाला जा रहा था। उसे धमकी दी गई थी कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी तो उसकी हत्या कर दी जाएगी।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You