2 तंवर हैं 20 सालों से आमने-सामने

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Saturday, November 30, 2013-12:37 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): इस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव छतरपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किए जाने के मुद्दे पर लड़ा जा रहा है। इसके साथ ही सड़कों की जर्जर हालत होने की वजह से लोगों में काफी रोष व्याप्त है।

इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के 2 तंवर उम्मीदवार पिछले 20 सालों से लगातार चुनावी अखाड़े में डटे हुए हैं। 10-10 साल तक दोनों ही यहां से विधायक रहे हैं। इस बार यहां से कांग्रेस के विधायक बलराम तंवर और भाजपा के पूर्व विधायक ब्रह्मसिंह तंवर के अलावा आप के ऋषिपाल पहलवान भी मैदान में हैं। इस क्षेत्र के अंतर्गत 3 वार्डों आया नगर से ग्यासी राम, भाटी से करतार सिंह तंवर, सैदुल्लाजाब से रामपाल यादव (तीनों भाजपा) और छतरपुर से अनिता त्यागी (निर्दलीय) निगम पार्षद हैं।

इतिहास:  भाजपा के प्रत्याशी ब्रह्म सिंह तंवर ने 1993 और 1998 में लगातार 2 बार चुनाव जीता था। उसके बाद 2003 और 2008 में बलराम तंवर चुनाव जीत गए लेकिन उनके खिलाफ चुनाव ब्रह्मसिंह तंवर ने ही लड़ा था। इससे पहले भी जब दिल्ली में महानगर परिषद् हुआ करती थी, तो आपातकाल के बाद हुए चुनाव में और 1983 में भी ब्रह्म सिंह तंवर ही चुनाव जीते थे।

इस बार छतरपुर विधानसभा सीट पर चुनाव में कुल 9 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस क्षेत्र की आबादी करीब अढ़ाई लाख है और इनमें से 1.70 लाख मतदाता हैं। यहां छतरपुर, आयानगर और संजय कॉलोनी 3 मुख्य अनधिकृत कालोनियां हैं, जिनमें मतदाताओं की संख्या 50 हजार से अधिक है। हार-जीत में इन कॉलोनियों के निवासियों की अहम भूमिका रहती है। इसके अलावा यहां 18 गांव हैं, जिनमें एक लाख से अधिक मतदाता हैं। आप के प्रत्याशी ऋषिपाल आयानगर में, बलराम डेरा मोड़ स्थित फार्म हाऊस में और ब्रह्मसिंह फतेहपुर असोला के रहते हैं।

समस्याएं: इस क्षेत्र के मतदाताओं का कहना है कि अंधेरिया मोड़ से मांडी गांव के बीच की सड़क दिनभर जाम रहती है। पचास हजार से अधिक वाहन इस रोड से गुजरते हैं। घंटों जाम लगा रहता है। लोग बुरी तरह से परेशान हैं। इस रोड को 200 फुट चौड़ा किया जाना था। 597 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत हो गया था।

बताया जाता है कि यदि काम शुरू हो जाता तो विधायक के 2 रिश्तेदारों के सड़क के साथ बने फार्महाऊस प्रभावित हो सकते थे। लोगों का आरोप है कि विधायक बलराम ने निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया। साथ ही बार-बार घोषणा होने के बावजूद सोनिया विहार जल संयंत्र का पानी आज तक इलाके के लोगों को नहीं मिल सका है।

मुकाबला: क्षेत्र में विभिन्न दलों के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। आप के प्रत्याशी मतदाताओं को कुछ प्रभावित तो कर रहे हैं लेकिन अभी तक की स्थिति को देखते हुए मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी के बीच ही होता दिख रहा है।


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