भाजपा को नहीं मिला एस.सी. का साथ

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Saturday, November 30, 2013-2:37 PM

नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): दिल्ली विधान सभा में पूर्ण बहुमत से आने का दावा करने वाली भाजपा के लिए आरक्षित सीटों के वोटरों को साधना कड़ी चुनौती  होगी। दिल्ली की 12 आरक्षित सीटों में से 9 पर कांग्रेस का कब्जा है। आरक्षित सीटों को लेकर राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि इस बार भी यहां का वोटर कांग्रेस पर ही चर्चा करेगा।

आरक्षित सीटों में सबसे मजबूत कांग्रेस की अंबेडकर नगर सीट है, जहां से गिनीज बुक रिकार्डधारी चौधरी प्रेम सिंह लगातार 11 चुनाव जीत चुके हैं। दूसरी सीट मंगोलपुरी विधानसभा की है। इस सीट पर दिल्ली सरकार में मंत्री राजकुमार चौहान है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि इस सीट पर चौहान को हराना टेढ़ी खीर है।

चौहान की इलाके में जबर्दस्त पकड़ है। देवली सीट पर बूटा सिंह के बेटे अरविंदर सिंह लवली ने जीत दर्ज कब्जा जमाया था। इनकी इलाके में अच्छी पैठ है। सीमापुरी से विधायक वीर सिंह धींगान की सीट भी कांग्रेस के पैतृक सीटों में गिनी जाती है। धींगान को इलाके का मजबूत नेता माना जाता है। मादीपुर विधानसभा में भी कांग्रेस का कब्जा है। इस सीट पर मालाराम गंगवाल चुनाव जीत विधानसभा पहुंचे थे। इस बार भी गंगवाल यहां से भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

पटेल नगर विधानसभा भी उन्हीं सीटों में से एक है। इस सीट पर कांग्रेस के राजेश लिलौठिया चुनावी मैदान में है। लिलौठिया करीब 10 हजार के अंतर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। क्षेत्र में विकास कार्य के दम पर इस बार भी चुनावी मैदान में जबर्दस्त टक्कर दे रहे हैं। जाट बहुल इलाके वाली बवाना सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। आरक्षित इस सीट पर सुरेंद्र कुमार ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस की पुस्तैनी सीट में कोंडली और सुल्तानपुर भी आता है।


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