सोनिया गांधी से भेंट कर वीरभद्र ने रखा अपना पक्ष

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Saturday, November 30, 2013-5:44 PM

शिमला: हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने खिलाफ आयकर रिटर्न आदि के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका को लेकर प्रदेश की राजनीति में उतार-चढ़ाव की बड़ी संभावना को देखते हुए आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट की है। सूत्र बताते हैं कि इस भेंट में वीरभद्र सिंह ने एक एनजीओ की तरफ से वरिष्ठ वकील व आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण के विरूद्व चाय बागान की खरीद को लेकर चल रही जांच के सभी तथ्यों से सोनिया गांधी को अवगत करवाया है।

बताया जाता है कि वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस की चार्जशीट में शामिल इस मामले की जांच के अलावा बाबा रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट को भाजपा के शासनकाल में दी गई भूमि को वापस लेने की जानकारी भी दी। इसके अलावा उन्होंने भाजपा के शासनकाल में एचपीसीए पर हुई पूर्व सरकार की मेहरबानियों की जांच और अब तक उसमें हुई तीन एफआईआर का ब्यौरा भी सोनिया गांधी के समक्ष रखा है।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ मुख्यमंत्री की यह पहली भेंट थी। जिसमें उन्होंने उक्त याचिका को अपने खिलाफ पूरी तरह से षडयंत्र करार दिया है। उन्होंने यह भी सपष्ट किया कि अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस की सरकार जब भाजपा के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रही है तो इस तरह से गलत आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने के लिए भाजपा के बड़े नेता इस तरह से षडयंत्रों को अंजाम दे रहे हैं। 

मुख्यमंत्री ने सोनिया गांधी को कांगे्रस पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र के प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में अवगत करवाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र को प्रदेश सरकार के नीतिगत दस्तावेज के रूप में अपनाया और घोषणा पत्र में किए गए सभी वायदों को प्रदेश में कार्यान्वित किया जा रहा है। वीरभद्र सिंह ने उन्हें राष्ट्रपति को पूर्व भाजपा सरकार के विरूद्घ कांग्रेस पार्टी द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में दी गई चार्जशीट पर की गई कार्रवाई के सम्बन्ध में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चार्जशीट में दिए गए सभी बिन्दुओं पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित बनाई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शासन में भ्रष्टाचार के विरूद्घ जीरो टोलरैंस की नीति अपना रही है। मुख्यमंत्री ने गांधी को समग्र विकास के लिए प्रदेश में आरम्भ की गई विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश को पेश आ रही कठिनाइयों की जानकारी भी दी।

वीरभद्र सिंह ने सोनिया गांधी से आग्रह किया कि वे पूर्व सैनिकों को न्याय दिलवाने के लिए एक रेंक एक पैंशन की योजना के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए सम्बन्धित मंत्रालयों को निर्देश दें। उन्होंने कहा कि इस योजना के कार्यान्वयन से प्रदेश के अधिकांश पूर्व सैनिक लाभान्वित होंगे और उन्हें वृद्घावस्था में अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री पद के चाहवान भी जुटे लाबिंग में
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर भले ही अभी तक होईकोर्ट ने 2 फरवरी तक सी.बी.आई. से जांच की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। लेकिन इस दौरान हिमाचल का मुख्यमंत्री बनने के सपने पालने वाले कुछ नेता अभी से लाबिंग में जुट गए हैं। चूंकि यह मामला पूरी तरह से रिकार्ड पर आधारित है इसलिए सत्ता, विपक्ष और अफसरशाही के गलियारों में यह आम चर्चा है कि अगर सी.बी.आई. इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लेता है तो वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री पद छोडऩा पड़ सकता है।

सूत्र बताते हैं कि चुनावों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी की जंग वीरभद्र सिंह और कौल सिंह ठाकुर के बीच चलती आई है। जबकि इससे पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचते-पहुंचते रुक चुकी विद्या स्टोक्स के अलावा एक और नेता मुख्यमंत्री पद पाने के लिए लांबिग में जुट गए हैं। यह सभी नेता अभी से अपना आधार बनाने की कोशिशों में हाईकमान के गलियारों में सक्रिय हो चुके हैं। उधर सरकार बनने से लेकर अब तक स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर चुप्पी साधे बैठे हैं। इस लंबी अवधि के दौरान उनका लो-प्रोफाईल रहना वीरभद्र सिंह समर्थकों की चिंताएं जरूर बढ़ा रहा है। क्योंकि कौल सिंह सोनिया गांधी के साथ नियमित संपर्क में हैं।
 


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