आतंकवाद एक वैश्विक खतरा: प्रणब मुखर्जी

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Saturday, November 30, 2013-7:41 PM

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज आतंकवाद के ‘‘संभावित खतरों और गंभीर चुनौती’’ पर जोर देते हुए आगाह किया कि इसके खिलाफ लड़ाई में स्वतंत्रता एवं आजादी के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुखर्जी ने अपने एक संदेश में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में, हम संविधान में वर्णित समानता, स्वतंत्रता, आजादी और न्याय के खास मूल्यों के साथ समझौता नहीं कर सकते।

उन्होने कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है। न्यायविदों की बुद्धिमत्ता से आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए लोकतंत्र, कानून का शासन और मानवाधिकारों का सम्मान बनाए रखते हुए एक मजबूत प्रणाली तैयार करने में मदद मिल सकती है।

प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले संदेश में कहा गया है कि आज आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे प्रमुख खतरों में से एक है। प्रधानमंत्री ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक सहमति के अनुरूप आतंकवाद विरोधी कानून को मजबूत बनाने के लिए कानूनों का समर्थन किया है।

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने अपने संदेश में कहा कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और आतंकवाद के कारण पूरी दुनिया में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम के शर्मा, अतिरिक्त सालिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा और अन्य को राष्ट्रीय विधि दिवस सम्मान प्रदान किए गए।अंतरराष्ट्रीय न्यायविद सम्मान यूएई के न्याय मंत्री डॅा हदफ जवान अल धहेरी, मारीशस के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वाई के जे यूंग आदि को भी दिए गए।
 


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