खादी विरोधी नीतियों के खिलाफ बंद रही दुकानें

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Saturday, November 30, 2013-10:11 PM

नई दिल्ली: खादी ने निजीकरण किए जाने के विरोध में सैंकड़ों गाधीवादियों ने शानिवार को सामूहिक रूप से चरखा कताई कर अपना विरोध दर्ज करवाया। अभियान से जुड़े गांधीवादियों ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह एक जनवरी से राजधानी में सत्याग्रह शुरू करेंगे, जिसमें देशभर के खादी संस्थाआें से जुड़े लाखों लोग शामिल होंगे।

खादी संस्थाआें को बचाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के संयोजक योगेन्द्र नाथ घई ने कहा कि सरकार बापू (महात्मा गांधी) के सपने को मारना चाहती है। सरकार खादी को प्राइवेट हाथों में देना चाहती है। अगर एेसा होता है तो देशभर में स्थिति सात हजार से अधिक खादी दुकानें पूरी तरह से बंद हो जाएगी और इससे जुड़े पौने 9 लाख लोग सड़कों पर आ जाएंगे।

 उन्होंने कहा कि सरकार से हमारी मांग है कि वह देशभर में स्थिति खादी संस्थाआें की समस्याआें का समाधान तत्काल प्रभाव से करें अगर वह ऐसा नहीं करती है तो हम एक जनवरी (214) से राजधानी में सत्याग्रह शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि सत्याग्रह में देशभर के खादी संस्थाआें से जुड़े लोग शामिल होंगे और वह क्रमिक अनशन करेंगे।

 मिशन के क्रियान्वयन समिति के सदस्य ए.के. शरण ने बताया कि सरकार खादी संस्थाआें को बंद करना चाहती है। इसलिए वह देशभर में स्थिति 15-16 विभागीय शो रूम को छोड़ कर अन्य सभी को प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सौंपना चाहती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में स्थिति 2 विभागीय शोरूम को छोड़ कर सभी दुकानें पूरी तरह से बंद रही। शरण के अनुसार राजधानी में करीब 50 दुकानें हंै।


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