आज भी अपने को एक छात्र ही मानते हैं दलाई लामा

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Sunday, December 01, 2013-12:16 PM

नई दिल्ली: आध्यात्म के प्रकाश से 21वीं सदी में देश दुनिया को शांति-मानवता का संदेश देने वाले तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा आज भी अपने को एक छात्र ही मानते हैं और वह अपना काफी समय पढाई लिखाई में बिताते हैं।

यहां एक कार्र्यक्रम में हिस्सा लेने आए तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू ने एक प्रश्न के उत्तर में एक न्यूज एजेंसी से कहा ‘‘मेरा काफी समय पढाई में गुजरता है। 78 वर्ष की आयु में भी मैं अपने को छात्र मानता हूं। मैं काफी पढ़ता हूं।’’

दलाई लामा ने उनके स्वस्थ और सक्रिय रहने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह दिन में पांच घंटे ध्यान एवं योग करते हैं। इसमें एक हिस्सा विपाषणा का होता है। इसके बाद बैठक करते हैं और लोगों से बातचीत करते हैं।

अपनी दिनचर्या का विवरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मेरी उम्र 78 वर्ष है। मैं शाम को सात बजे सो जाता हूं और 7..8 घंटे की गहरी नींद लेता हूं। सात-आठ घंटे की गहरी नींद भी ध्यान का एक तरीका है।’’  

उन्होंने कहा कि वह रात में भोजन नहीं करते हैं। लेकिन सुबह पेटभर नाश्ता करते हैं।  उन्होंने कहा, ‘‘मैं सुबह साढ़े तीन बजे जग जाता हूं और साढ़े पांच बजे तक मुझे भूख लगने लगती हैं। तब मैं पेटभर नाश्ता करता हूं।’’  दलाई लामा ने कहा कि साढ़े ग्यारह बजे वह दोपहर का भोजन लेते हैं। यह उनका नियमित कार्यक्रम होता है।


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