चुनाव दिल्ली में, एन.सी.आर. में छलके जाम

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Sunday, December 01, 2013-2:07 PM

नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र):  दिल्ली से सटे वैशाली का एक फार्म हाऊस। ऊंची दिवारों के पीछे से तेज आवाज में बजता संगीत, रंग बिरंगी लाइटें और मदहोशी पैदा करती रोशनी। फार्म हाऊस के लॉन में एक ओर लगी देशी-विदेशी शराब की बार, एक कोने में आरकेस्ट्रा की धुन पर थिरकती, देशी-विदेश नर्तकियां। देखने से लगता है, जैसे किसी रईसजादे की शादी पार्टी चल रही हो लेकिन यह कोई शादी पार्टी नहीं, चुनावी पार्टी है।

नेताजी ने चुनावों में पसीना बहा रहे अपने चंपुओं की थकान उतारने का यह नया तरीका निकाला है। यहां दिल्ली में चल रही चुनावी आचार संहिता लागू नहीं होती। चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस के कानूनी हाथ भी यहां तक नहीं पहुंच सकते। इसीलिए एनसीआर को चुना गया है। किसी तरह का कानूनी लोचा न आए, इसका भी पूरा इंतजाम किया गया। सूत्रों की मानें तो फार्म हाउस की इन पार्टियों में कानून चकमा देना के लिए बाकायदा शादी, साल गिरह व जन्म दिन के कार्ड छपवाए गए हैं।

नेताजी की इस पार्टी में जाना अपने आपमें बेहद मुश्किल काम है। जब तक नेताजी की ओर से इशारा नहीं मिल जाता तब तक इस पार्टी की पर्ची नहीं मिलती। पर्ची खुद नेताजी व्यक्ति का चेहरा देखने के बाद देते हैं। दिल्ली चुनावों की यह पार्टियां गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुडग़ांव, सूरजकुंड आदि स्थानों पर की जा रही हैं। रात में इतनी दूर जाना बेहद कठिन काम है।

गाजियाबाद के वैशाली स्थित एक फार्म हाउस में पार्टी का मजा चख चुके दिनेश जैन ने बताया कि लोगों को लाने ले जाने का इंतजाम भी नेताजी की ओर से ही किया गया है। जिन लोगों को फार्म हाउस में थकान उतारने की पर्ची दी जाती है, उसे वहां तक पहुंचाने का इंतजाम भी नेताजी ही कराते हैं। इसके लिए कई मंहगी गाडिय़ां लगाई गई हैं। पर्ची देखकर चालक लोगों को फार्म हाउस के अंदर तक छोड़ कर आते हैं। फार्म हाउस के गेट पर लोगों से पर्चियों को वापस ले लिया जाता है।


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