ग्रेटर कैलाश में कड़ा मुकाबला

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Sunday, December 01, 2013-3:45 PM

नयी दिल्ली: ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला है और यहां के लोगों की नाराजगी के चलते मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को यातायात समस्या की जड़ माने जाने वाले विवादास्पद बस रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर खत्म करने की घोषणा करनी पड़ी।

यहां यातायात जाम के अलावा कार पार्किंग, जलभराव, स्वच्छता, जल-मल निकास और वाणिज्यिक गतिविधियों का विस्तार मुद्दे हैं। भाजपा ने विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार मल्होत्रा के बेटे अजय को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने विरेंद्र कासना को टिकट किया है। आम आदमी पार्टी की ओर से सौरभ भारद्वाज चुनावी दंगल में हैं।

इलाके के लोग वर्ष 2008 में बीआरटी कॉरिडोर की स्थापना के समय से ही इसका विरोध कर रहे हैं जबकि दिल्ली सरकार ने इसका जमकर बचाव किया। अब कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अंबेडकर नगर और दिल्ली गेट के बीच इस कॉरिडोर को खत्म करने का वादा किया है। जहां गांव बढ़ते पानी बिजली, खराब सड़के और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं वहीं पॉश कॉलोनियों का कुछ अलग ही रेाना है।

ग्रेटर कैलाश निवासी राजीव कटारिया कहते हैं, ‘‘मास्टरप्लान में छूट और लेागों को बंगला से लेकर चार मंजिले भवन बनाने का प्रोत्साहन मिला तो लेकिन पानी निकास और पार्कों पर ध्यान नहीं दिया गया। जीके में पानी, बिजली और महंगे होते प्याज के बजाय बुनियादी ढांचा, सुरक्षा और पार्किंग अधिक अहम समस्या है। ’’

मोबाइल फोन और चेनों की झपटमारी की घटनाएं ग्रेटर कैलाश में चिंता का विषय है। तेजी से बढ़ती आबादी संसाधनों पर भारी पड़ रही है। पार्किंग के लिए जगह कम पड़ती जा रही है। वैसे मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच संभावित है लेकिन आम आदमी पार्टी ने भी मतदाताओं के बीच पैठ बनाई है। कुल छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में है।

ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र में अलकनंदा, जीके-1 और 2, पंचशील एंक्लेव जैसी पॉश कॉलोनियां तथा जमरूदपुर, सावित्री विहार, शाहपुर जट जैसे शहरीकृत गांव तथा बिंदुसार कैंप जैसी कुछ झुग्गी बस्तियां भी आती हैं।


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