कौन समझेगा 6 हजार परिवारों का दर्द

  • कौन समझेगा 6 हजार परिवारों का दर्द
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Monday, December 02, 2013-12:03 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): राजधानी में रहने वाले 6,000 परिवारों के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। इन परिवारों की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। दिल्ली सरकार ने तो इनसे मुंह मोड़ लिया है।3000 मिट्टी तेल की दुकानें बंद करके सरकार ने कैरोसीन मुक्त दिल्ली का दावा तो कर दिया, लेकिन इनके लिए रोजगार का कोई जरिया नहीं दिया। सरकार के दावों के विपरीत मिट्टी का तेल ब्लैक में जमकर बिक रहा है।

राजधानी में लगभग 3000 मिट्टी के तेल की दुकानें थीं। इन दुकानों से 3000 परिवार जुड़े हुए थे। हर दुकान पर एक कर्मचारी भी काम करता था। इस तरह कुल 6000 परिवारों का गुजर-बसर रहा था। कुछ महीने पहले अचानक दिल्ली सरकार ने इन दुकानों को बंद करने का फैसला  कर दिया।

शुरू में ऐसा कहा गया कि इन लोगों को राशन की दुकानें दी जाएगी लेकिन बाद में भुला दिया गया। दुकानदारों का कहना है कि भारत के किसी भी राज्य में मिट्टी का तेल बंद नहीं किया गया है। दिल्ली से ज्यादा आबादी मुंबई में है और वहां भी मिट्टी का तेल चल रहा है।
सरकार ने सभी श्रेणी के कार्ड पर मिट्टी का तेल बंद कर दिया है। ए.पी.एल. कार्ड धारकों को फ्री में गैस कनैक्शन नहीं दिए। क्या ये कार्ड धारक गरीब नहीं है? मजदूरी करके पेट पालने वाला व्यक्ति गैस कहां से पाएगा।

बावजूद मिट्टी का तेल तो 60 रुपए लीटर ब्लैक में जमकर बिक रहा है। दुकानदारों का कहना है कि 2008 के बाद एक भी नए कार्ड पर राशन व तेल नहीं दिया गया है, जबकि एक छोटे से कमे में किराए पर रहने वाला व्यक्ति उसी कमरे में गैस व चूल्हा कहां से रख पाएगा। क्या उसके पास कोई रसोई है। इन दुकानों पर काम करने वाले हजारों कर्मचारियों का कहना है कि अचानक नौकरी जाने से वो तो रोटी को मोहताज हो गए हैं।

राष्ट्रीय खाद्य योजना पर सवाल उठाते हुए दुकानदार कहते हैं कि यह जनता के साथ छलवा है। क्या पांच किलो अनाज में एक आदमी पूरे महीने गुजारा कर सकता है। दिल्ली के गरीब लोगों के साथ धोखा करने के कारण ही मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को राहुल गांधी की जनसभा में बार-बार विनती करनी पड़ी कि रुक जाइये, राहुलजी की सुनकर तो जाइये। दुकानदार मुख्यमंत्री के इस विडियो को तमाम लोगों को दिखाकर कांग्रेस की खिलाफत कर रहे हैं।


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