पिछली बार किस्मत ने दिया था साथ पर अब...

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Monday, December 02, 2013-12:50 PM

नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र): दिल्ली विधानसभा चुनावों में कई सीटों पर इस बार भी कांटे की टक्कर होगी। करीब आधा दर्जन से अधिक सीटें ऐसी हैं, जिन पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार बहुत ही कम अंतर से जीते थे। हारने वाले उम्मीदवार दिल में कसक लिए इस बार के चुनावों का इंतजार कर रहे थे।

हारने वालों ने पूरे पांच साल तक उसी इलाके में जमकर पसीना बहाया है,  जिस इलाके में वह हारे थे। इसलिए इन सीटों पर मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है।दिल्ली में आठ सीटें ऐसी हैं जिन पर जीत-हार के लिए असली घमासान होगा। पिछली बार इन सीटों पर जीतने वाले प्रत्याशियों की जीत का अंतर एक हजार वोटों से भी कम रहा था। इन आठ सीटों में से छह पर कांग्रेस का कब्जा है। दो सीटों पर ही भाजपा के उम्मीदवार जीत पाए थे।

भारतीय जनता पार्टी इन सीटों पर कब्जा करने के लिए अपने डोर-टू-डोर कैंपेन को सबसे कारगर हथियार मान रही है। इस कैंपेन से इन आठ सीटों के वोटरों को अधिक से अधिक संख्या में बाहर निकल कर वोट करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इनमें भी पहली बार वोट करने वाले और युवा वोटरों पर भाजपा की नजर है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार दिल्ली की हर विधान सभा में 19 से 20 हजार नए वोटर हैं। अगर हर सीट के मुताबिक आंकड़ों पर गौर किया जाए तो दिल्ली की हर सीट पर लगभग 5 हजार ऐसे वोटर हैं जो पहली बार वोट डालेंगे। भारतीय जनता पार्टी की नजर इन्हीं वोटरों पर सबसे ज्यादा है।

पूर्वी दिल्ली में कई सीटों पर रोमांचक मुकाबला होने वाला है, भाजपा के सीएम इन वेटिंग डा. हर्षवर्धन भी पिछले चुनावों में महज 3204 वोटों से जीत पाए थे। पिछली विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक रहे साहिब सिंह चौहान भी मात्र 580 वोटों से ही जीत पाए थे। इस सीट पर बसपा खेल बिगाडऩे की स्थिति में है। इस सीट पर भी मुकाबला रोचक होगा। इसके अलावा त्रिलोकपुरी सीट पर भी कांग्रेस इस बार भाजपा से सीट झपटने की उम्मीद लगाए बैठी है। इस सीट पर मौजूदा भाजपा विधायक सुनील वैध मात्र 634 वोटों से जीते थे।


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