एक- तिहाई विधानसभा सीटों पर फैसला करेंगे प्रवासी

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Tuesday, December 03, 2013-11:26 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): राजधानी में आकर बसे 50 लाख से अधिक प्रवासी 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के चुनाव में एक-तिहाई सीटों पर निर्णायक भूमिका अदा करेंगे। एक जमाने में कांग्रेस का वोट बैंक माने जाने वाली इन कालोनियों के मतदाता पिछले कुछ समय से नाराज दिख रहे हैं। उनका कहना है कि आखिर क्या वजह है कि प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिए जाने के बावजूद उनकी कालोनियों को नियमित नहीं किया गया है।
 
इस चुनाव में पहली बार ऐसा दिख रहा है कि इन अनधिकृत कालोनियों के निवासियों में इस बात को लेकर भी काफी रोष है। 
विभिन्न कालोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि सरकार ने घोषणा की थी 895 अनधिकृत कालोनियों को नियमित कर दिया गया है। इनमें 585 कालोनियां सरकारी जमीन पर और 312 कालोनियां निजी जमीन पर विकसित हैं।

सरकार की घोषणा से इन कालोनियों में जमीन के दाम तो काफी बढ़ गए, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से वहां के लोग आज तक वंचित हैं। लोगों का कहना है कि 2008 के चुनाव में जब सरकार ने कालोनियों को प्रोवजनल सार्टिफिकेट दिए थे, तो लगा था कि अब अनधिकृत कालोनियों पर अर्से से लटकी तलवार अब हट जाएगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

पूर्वांचलियों में भी है रोष:
अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले पूर्वांचलियों का कहना है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली को मिनी हिन्दुस्तान बताते हुए इसे प्रवासियों का शहर बताया था। कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी डॉ. शकील अहमद भी इसकी वकालत करते रहे हैं।

लेकिन कांग्रेस से जुड़े पूरब के लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है कि विश्वास दिलाने के बावजूद कांग्रेस ने दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली नेताओं को प्रत्याशी बनाने में कंजूसी क्यों की?


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