'हथियारों के जखीरे से हो सकते हैं 26/11 जैसे हमले'

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Wednesday, December 04, 2013-6:53 AM

नई दिल्ली : नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. जोशी ने आज आगाह किया कि कुछ देशों के लड़ाकों के साथ अनियंत्रित हथियारों के जखीरे (पानी में तैरते आयुध भंडार)  ले जाते निजी पोत ङ्क्षचता के सबब हैं  और आतंकियों की घुसपैठ समेत देश के लिए उसकी सुरक्षा के गंभीर परिणाम हो सकते हैं जिससे 26/11 की तरह के हमले हो सकते हैं।

वाॢषक नौसेना दिवस संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने समुद्री डकैती वाले इलाकों में सफर करने वाले व्यापारिक पोतों के लिए उच्च जोखिम के क्षेत्र बदलने का आग्रह किया और कहा कि इन क्षेत्रों में इस तरह के विस्तार से केरल तट के निकट इतालवी नाविकों के हाथों 4 भारतीय मछुआरों की हत्या जैसी घटनाएं हुई हैं। जोशी ने कहा, ‘‘हथियारों के तैरते जखीरे बहुत गंभीर ङ्क्षचता का विषय है। यह पूरी तरह अनियमित है।

आतंकवादियों की घुसपैठ समेत हमारे लिए इसके बहुत गंभीर सुरक्षा परिणाम हो सकते हैं।’’  भारत की परमाणु पनडुब्बी आई.एन.एस. अरिहंत 1-2 सप्ताह के भीतर समुद्री परीक्षणों के लिए निकलने की तैयारी कर रही है और एक साल की कड़ी जांच-परख के बाद इसे नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा। एडमिरल जोशी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परमाणु पनडुब्बी के समुद्री तट पर होने वाले तमाम परीक्षण शत-प्रतिशत पूरे हो गए हैं और अब इसे विभिन्न संभावित आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों के दौर से गुजारा जा रहा है।

एडमिरल जोशी ने कहा कि तीनों सेनाएं इस बात पर अपनी सहमति दे चुकी हैं कि चीफ आफ डिफैंस स्टाफ (सी.डी.एस.) का पद सृजित होने से पहले अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सैन्य प्रमुखों की समिति के अध्यक्ष पद को स्थायी रूप दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं ने इस व्यवस्था के बारे में अपनी सहमति दी है जो नरेश चंद्रा कमेटी की सिफारिशों के तौर पर सरकार के पास है। उन्होंने कहा कि इस सिफारिश पर सरकार कब निर्णय लेती है और किस रूप में यह फैसला लागू होता है इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते।


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