भाजपा-कांग्रेस को टक्कर देने वाली पार्टियों ने चुप्पी साधी

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Wednesday, December 04, 2013-4:20 PM

जयपुर: आपसी तालमेल के माध्यम से प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर एकजुटता का प्रदर्शन करने के दावे झूठे साबित होने के बाद प्रदेश में तीसरे विकल्प के रूप में उभर रही पार्टियों ने चुनाव के बाद अब तक अपनी आगामी नीति का खुलासा नहीं किया है। प्रमुख पार्टियों की तरह ऐसी पार्टियों को भी इस बार दिग्गज बागी नेताओं से खतरा नजर आ रहा है। अब तक नई सरकारों के निर्माण में अहम भूमिका रखने वाली तीसरे विकल्प की पार्टियां भी इस बार बागियों की ताकत को नकारा नहीं रही हैं। चुनाव के दो दिन बाद भी तीसरा मोर्चा अपनी आगामी नीति को लेकर कोई संकेत नहीं दे रहा है।

इसके इतर प्रमुख पार्टियों ने प्रदेश स्तर पर चुनावी समीक्षा शुरू कर दी है और अंदरखाने में सरकार निर्माण को लेकर प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के बागियों से सम्पर्क साधना भी शुरू कर दिया है। गत विधानसभा चुनाव में जीते हुए छह बसपा प्रत्याशियों के कांग्रेस सरकार में शामिल हो जाने से आहत बसपा ने इस बार टिकट वितरण में तो तत्परता दिखाई और सबसे पहले प्रत्याशियों के नाम घोषणा कर चुनावी हलचल तेज कर दी मगर चुनाव के बाद से लेकर अब तक बसपा की सुप्त पड़ी राजनीति को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है।

कमोबेश यही हालत सपा और तीसरा मोर्चा के रूप में तेजी से उभर रही राजपा की नजर आ रही है। इस बार के चुनाव में बेहतर परफोरमेंस के दावे कर रहा तीसरा मोर्चा हार-जीत के आकलन में जुट गया है और इस बीच अपनी आगामी नीति स्पष्ट नहीं कर रहा है। चुनाव के नजदीकी दिनों में हालांकि अपने इक्का-दुक्का प्रत्याशियों के प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों को समर्थन दे देने से बसपा को हल्का झटका लगा था। चुनाव से पूर्व हुए इस तरह के नुकसान के बाद अब पार्टी की नजर परिणामों पर लगी हुई है।


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