केंद्र की विदेश नीति ही तृणमूल की नीति: ममता

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Thursday, December 05, 2013-10:54 AM

बांग्लादेश: बांग्लादेश के साथ भूमि सीमा करार और तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर अपनी पार्टी के विरोध से असहमति जताते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की विदेश नीति का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम विदेश जाते हैं तो हमारा देश ही प्राथमिकता में रहता है...जब मैं विदेश जाती हूं तो मैं केवल अपनी पार्टी के नजरिए को ही नहीं रखती हूं।

 

मैं अपने देश के प्रति अपने विचारों को रखती हूं...यही लोकाचार है कई लोग मुझसे पूछते हैं कि आपकी विदेश नीति क्या है? सरकार की नीति पार्टी की नीति होती है?’’ राज्य विधानसभा की 75वीं वर्षगांठ के समापन सत्र के मौके पर बनर्जी ने कहा, ‘‘देश का हित कुछ खास क्षेत्रों में पार्टी की नीति से कहीं ऊपर होता है।’’ भारत-बांग्लादेश के रिश्ते को प्रभावित करने वाले दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर बनर्जी का दावा हालांकि उनकी अपनी ही पार्टी के नजरिए के बिलकुल उलट है।

 

इससे पहले उन्होंने प्रस्तावित भूमि सीमा समझौते को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करने की संभावना को खारिज कर दिया था। इस समझौते के तहत 162 बुरी तरह घिरे एन्क्लेव का दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान किया जाना है। तीस्ता जल बंटवारा समझौता तृणमूल के पुरजोर विरोध के कारण अधर में लटक गया।

 

तृणमूल को इस समझौते से उत्तरी पश्चिम बंगाल में त्रासदी की आशंका थी। पिछले वर्ष सितंबर में बनर्जी ने तीस्ता जल साझीदारी को लेकर बांग्लादेश के साथ हुए करार पर मनमोहन सिहं सरकार की खिंचाई की थी। ममता के तीव्र विरोध के कारण केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को एजेंडे से बाहर कर दिया था।


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