चायवाला भी बन सकता है प्रधानमंत्री : दिग्विजय

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Thursday, December 05, 2013-3:39 PM

नई दिल्ली: नरेन्द्र मोदी के मुखर आलोचक माने जाने वाले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आज अप्रत्याशित टिप्पणी करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री अपनी ‘उन्मादी’ विचारधारा से हट रहे हैं और एक चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है।  भाजपा ने अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी के लिए की गयी इस टिप्पणी को हाथों हाथ लेते हुए इसका स्वागत किया। सिंह ने कहा कि वह इस बात का स्वागत करते हैं कि मोदी धीरे धीरे अपनी उन्मादी विचारधारा से हट रहे हैं और अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधारा की ओर बढ रहे हैं और ‘‘इसका स्वागत करना चाहिए कि यदि संघ और भाजपा .... कांग्रेस और (जवाहरलाल) नेहरू की विचारधारा के करीब आ रहे हैं।’’

उन्होंने हालांकि कहा कि मोदी भारत की जनता को स्वीकार्य नहीं होंगे और खुदा न करे यदि भाजपा सत्ता में आये तो वह सुषमा स्वराज को मोदी के मुकाबले तरजीह  देंगे।  सिंह इस बात को गलत बताया कि कांग्रेस एक परिवार और कुछ विशेष लोगों के हाथों में है और भाजपा की तरह कांग्रेस आम कार्यकर्ता को बढते नहीं देखना चाहती।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि केरल का कोई गरडिया राष्ट्रपति बन सकता है तो एक चाय वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता।  भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने सिंह की टिप्पणी को लपकते हुए कहा कि हमने नहीं सोचा था कि दिग्विजय सिंह कहेंगे कि एक चाय वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है। ‘‘मुझे खुशी है कि मोदी जी की तारीफ दिग्विजय सिंह जी कर रहे हैं।’’

इस पर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी अछूता नहीं है भले ही वह किसी भी परिवार, चाहे अमीर या गरीब, में जन्मा हो।  सिंह ने कहा कि भारत की जनता को वाजपेयी और सुषमा स्वीकार्य हो सकते हैं लेकिन मोदी स्वीकार्य नहीं होंगे। वह इंडिया टुडे समूह के दो दिवसीय कान्क्लेव ‘एजेण्डा आज तक 2013’ में बोल रहे थे।  उन्होंने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के ‘एक्जिट पोल’ को भी गलत करार दिया और ये बात मानने से मना कर दिया कि ये चुनाव आगामी लोकसभा चुनावों के सेमीफाइनल की तरह हैं।

 सिंह ने कहा कि कांग्रेस की लडाई किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि विचारधारा से है और चूंकि मोदी ने अहसास कर लिया है कि देश कट्टर विचारधारा को स्वीकार नहीं करेगा इसलिए उनकी विचारधारा में बदलाव आ रहा है।

उन्होंने कहा कि मोदी अब कटटर विचारधारा से अटलजी की विचारधारा के निकट आ रहे हैं और समावेशीकरण की बात कर रहे हैं। सिंह ने मजाक में कहा कि यह स्मृति ईरानी का प्रभाव है। उनकी सोहबत के कारण मोदी की विचारधारा बदल रही है। इस पर स्मृति ने कहा कि यह दोनों पार्टियों में नेतृत्व की प्रकृति के भेद को दर्शाता है।

 भाजपा में छोटे से छोटे कार्यकर्ता की भी सुनी जाती है लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता की भी नहीं सुनते। सिंह ने कहा कि गांधी का अपना स्टाइल है और उन्हें अपनी समावेशी विचारधारा को साबित करने की आवश्यकता नहीं है, जो उनमें स्वभावत: है।सिंह ने एक युवती की जासूसी मुद्दे पर मोदी को आडे हाथ लेते हुए अपनी मांग दोहरायी कि भारतीय टेलीग्राफ एक्ट और आईटी कानून के तहत मामले की जांच होनी चाहिए। स्मृति ने हालांकि टेपों की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त करते हुए सवाल किया कि क्या महिला ने कोई शिकायत की है।
    स्मृति ने कहा कि ये अपुष्ट आरोप 2014 के लोकसभा चुनावों में मुद्दा नहीं बनेंगे , जब जनता भ्रष्टाचार, महंगाई और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतदान करेगी।

सिंह ने ये बात मानने से इंकार कर दी कि एक्जिट पोल में कोई दम है या पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी का उदय साबित होंगे।  भाजपा नेता ने कहा कि जनता इन विधानसभा चुनावों के जरिए अपनी राय दे रही है और 2014 के चुनावों में उनकी पार्टी विजयी होगी।  सिंह ने तर्क दिया कि 2009 के लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव जीते।

 


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