सरकार सभी मुद्दों पर व्यापक आमसहमति बनाने का प्रयास करेगी: PM

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Thursday, December 05, 2013-12:38 PM

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी की ओर से साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निरोधक विधेयक को ‘आपदा का नुस्खा’ करार दिये जाने के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि सरकार उन सभी मुद्दों पर व्यापक आमसहमति बनाने का प्रयास करेगी जिनका विधायी महत्व काफी अधिक है। सिंह ने कहा कि सरकार विधेयकों को सुगमता से पारित कराना सुनिश्चित करने के लिए संसद के सभी वर्गो का सहयोग चाहती है। भाजपा ने जहां सम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निरोधक विधेयक पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है, वहीं समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण जैसे विवादास्पद विधेयक लाने पर संसद का कामकाज बाधित करने की धमकी दी है। 

प्रधानमंत्री ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हमारा प्रयास होगा कि विधायी महत्व के विषयों पर व्यापक आमसहमति बनायी जाए।’’ भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की ओर से साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निरोधक विधेयक का विरोध किये जाने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही। लक्षित हमलों से अल्पसंख्यकों को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य वाला विधेयक आज शुरु हुए संसद के शीतकालीन सत्र के लिए सरकार के विधायी कार्यो के एजेंडे में शामिल नहीं है।

प्रधानमंत्री के बयान के बाद गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी संवाददाताओं से कहा कि सरकार विधेयक पर आमसहमति बनाने का प्रयास करेगी। भाजपा साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निरोधक विधेयक का पुरजोर विरोध कर रही है। पार्टी ने कहा कि जब यह विधेयक संसद में चर्चा के लिए पेश किया जायेगा तब वह इसका इस आधार पर विरोध करेगी कि यह भारत में साम्प्रदायिक सौहार्द को खतरा पैदा करेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में लाया जायेगा, प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ जिन विधेयकों को संसद में चर्चा के लिए लाया जायेगा, उसके बारे में हम आमसहमति बनायेंगे और विधेयकों के सुगमता से पारित होना सुनिश्चित करने के लिए सदन के सभी वर्गो का सहयोग चाहते हैं।’’ 

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला संविधान संशोधन विधेयक मार्च 2010 में राज्यसभा में पारित हो चुका है हालांकि सपा, जदयू और राजद समेत कुछ विपक्षी दलों के भारी विरोध के कारण यह लोकसभा में पारित नहीं हो सका है।  प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ चूंकी शीतकालीन सत्र में 12 कामकाजी दिवस है और यह कम अवधि का है, इसलिए संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी राजनीतिक दलों का यह दायित्व है कि वे जरूरी कार्य तेजी और सुगमता से पूरा कराने का हर संभव प्रयास करें।

 


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