देश को इलेक्ट्रानिक्स के विनिर्माण का केन्द्र बनाना होगा: मनमोहन

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Thursday, December 05, 2013-2:57 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि भारी आयात बिल से बचने के लिए भारत को इलेक्ट्रानिक्स एवं दूरसंचार उपकरणो के विनिर्माण का प्रमुख केन्द्र बनाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने दूरसंचार विभाग के सहयोग से भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (फ्क्किी) द्वारा आयोजित टेलीकाम इंडिया 2013 का शुभारंभ करते हुए कहा कि मैं आज फिर से पिछले वर्ष इसी सम्मेलन में कही अपनी बातो का दोहराता हूं कि भारत को इलेक्ट्रानिक्स एवं दूरसंचार उपकरणो के विनिर्माण का प्रमुख केन्द्र बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2020 तक भारत को वाॢषक 300 अरब डालर केइलेक्ट्रानिक उत्पादो का आयात करना पडेगा जो हमारे तेल आयात बिल से भी अधिक होगा। सिंह ने कहा कि इस आयात की पूर्ति में आने वाली कठिनाइयो से निपटने के लिए हमे अभी पहल करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में विनिर्माण केन्द्र होने चाहिए जिससे इलेक्ट्रानिक उत्पादो के कारोबार को संतुलित किया जा सक और वैश्विक आपूॢत का हिस्सा बन सके। उन्हें यह जानकर काफ्ी खुशी हुयी है कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग देश में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण गतिविधियो को बढाने की दिशा में कार्यरत है।

प्रधानमंत्री ने देश में दूरसंचार उद्योग को बढावा देने पर जोर देते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। नई दूरसंचार नीति बनाई गई है जिसमें कई जटिल मुद्दो का सरलीकरण किया गया है। इसके साथ ही लाइसेंस नीति को भी उदार बनाया गया है तथा दूरसंचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। स्पेक्ट्रम का आंवटन पारदर्शी तरीके से किया गया है। दूरसंचार विभाग ने एकीकृत लाइसेंस जारी करना शुरू कर दिया है और शीघ्र ही विलय एवं अधिग्रहण के लिए दिशा निर्देश जारी किये जायेंगे।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार उद्योग में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को 74 प्रतिशत से बढाकर शत प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार द्वारा इस उद्योग के लिए किये गये उपायो से निवेशको की चिंताओ को दूर करने का प्रयास किया गया है और इससे देश में दूरसंचार उद्योग का तीव्र विकास होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी बहुत अच्छी नहीं है। देश में प्रति व्यक्ति इंटरनेट उपयोग बहुत कम है। बडे शहरो के बाहर भी इंटरनेट की उपलब्धता और विश्वसनीयता बनाने की जरूरत है। इंटरनेट के माध्यम से आने वाले बदलाव आम लोगों के जीवन में भी दिखना चाहिए। वर्तमान में ट्रेवल बुकिंग, बैंकिंग, शापिंग और शिक्षा के क्षेत्र इंटरनेट का उपयोग बढा है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार के मामले में ग्रामीण शहरी अंतर को पाटने की तत्काल आवश्यकता है। यह अंतर समाज में भेदभाव का कारक नहीं बनना चाहिए। इसके उलट हमें सामाजिक आॢथक अंतर को कम करने के लिए दूरसंचार की अपार संभावनाओ का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मोबाइल फ्नो बैंकिंग सेवाए बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराकर वित्तीय समावेश के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आधार नंबर के माध्यम से इसको हकीकत बनाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक काम कर रहा है। थ्रीजी कनेक्टिविटी से शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति आ सकती है और इसके माध्यम से छात्र घर से बाहर निकले बगैर ही अच्छे शिक्षको से शिक्षा हासिल कर सकेंगे। इस दिशा में दूरसंचार आयोग काम कर रहा है।


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