न्यायमूर्ति गांगुली का आचरण अशोभनीय: हाई कोर्ट

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Thursday, December 05, 2013-10:22 PM

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की समिति न्यायमूर्ति ए. के. गांगुली के खिलाफ शिकायत करने वाली कानून की इंटर्न के बयान से इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पहली नजर में उनका गांगुली का आचरण ‘अवांछित’ और ‘यौन’ प्रकृति का था।
 
अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में उसके द्वारा अब किसी और कार्रवाई की जरूरत नहीं है क्योंकि इस घटना के दिन 24 दिसंबर, 2012 को न्यायमूर्ति गांगुली सेवानिवृत्त हो चुके थे।

न्यायाधीशों की समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमने इंटर्न के बयान तीन गवाहों के हलफनामों और न्यायमूर्ति ए.के.गांगुली के बयान का बारीकी से अध्ययन किया है। समिति को ऐसा लगता है कि 24 दिसंबर, 2012 की शाम वह होटल ली मेरीडियन में गांगुली के काम में मदद के लिये गयी थी। इस तथ्य से न्यायमूर्ति गांगुली ने भी अपने बयान में इंकार नहीं किया है।

प्रधान न्यायाधीश पी. सदाशिवम ने दो पेज के बयान में इस इंटर्न के नाम का खुलासा किया। न्यायमूर्ति सदाशिवम के अनुसार इंटर्न उच्चतम न्यायालय के रोल पर इंटर्न नहीं थी और संबंधित न्यायाधीश भी इस घटना के दिन सेवानिवृत्त हो जाने के कारण अवकाश ग्रहण कर चुके थे, इस अदालत द्वारा आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

उन्होने कहा कि समिति की रिपोर्ट की प्रति इंटर्न और न्यायमूर्ति गांगुली को भेज दी जाये। कानून की इंटर्न से ‘हाल ही में सेवानिवृत्त न्यायाधीश’ के दुव्र्यवहार के बारे में मीडिया में आयी खबरों के आधार पर प्रधान न्यायाधीश ने 12 नवंबर को न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा, न्यायमूर्ति एच. एल दत्तू और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की तीन सदस्यों की जांच समिति का गठन किया था।

 इस समय पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर आसीन न्यायमूर्ति गांगुली ने इन आरोपों से इंकार करते हुये कहा था कि वह इससे हतप्रभ हैं। यह प्रकरण चर्चा में आने के बाद से ही न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ कार्रवाई और आयोग के अध्यक्ष पद से उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है।


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