यौन शोषण मामलाः न्यायमूर्ति गांगुली का आचरण यौन प्रकृति का था

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Friday, December 06, 2013-7:04 AM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की समिति न्यायमूर्ति ए के गांगुली के खिलाफ शिकायत करने वाली कानून की इंटर्न के बयान से इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि पहली नजर में उनका (गांगुली का) आचरण ‘अवांछित’ और ‘यौन’ प्रकृति का था। अब यह मांग उठने लगी है कि आपराधिक कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

एक साल से भी ज्यादा समय पहले उच्चतम न्यायालय से सेवानिवृत हुए न्यायमूर्ति गांगुली अभी पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं। उन पर एक इंटर्न ने आरोप लगाया था कि पिछले साल दिल्ली में एक होटल के कमरे में उन्होंने उसका यौन उत्पीडऩ किया। हालांकि, न्यायमूर्ति गांगुली ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को सिरे से नकारा है।

कानून की इंटर्न से ‘‘हाल ही में सेवानिवृत्त न्यायाधीश’’ के दुव्र्यवहार के बारे में मीडिया में आईं खबरों के आधार पर प्रधान न्यायाधीश ने 12 नवंबर को न्यायमूर्ति आर एम लोढा, न्यायमूर्ति एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की तीन सदस्यों की जांच समिति का गठन किया था। इस इंटर्न ने न्यायाधीश के नाम का जिक्र किये बगैर ही एक ब्लॉग में लिखा था कि जब देश राजधानी में 16 दिसंबर की घटना पर उद्वेलित था तो उसी दौरान एक न्यायाधीश के हाथों उसे वेदनापूर्ण अनुभव से गुजरना पड़ा था।


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