इशरत जहां मुठभेड़: पूरक आरोपपत्र पर अंतिम राय ली जा रही

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Friday, December 06, 2013-9:16 AM

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो नौ साल पुराने इशरत जहां मुठभेड़ हत्या मामले में जांच टीम द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों के खिलाफ एकत्र किए गए सबूतों का विश्लेषण करने में जुटा है और यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि उनकी गतिविधियां नियमित ड्यूटी का हिस्सा थीं या किसी साजिश का। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इशरत जहां मुठभेड़ मामले में जांच पूरी हो चुकी है और अब जांच एजेंसी निदेशक की मंजूरी का इंतजार कर रही है जो जांच दल के तथ्यों का अध्ययन कर रहे हैं।

 

सीबीआई निदेशक द्वारा यह तसल्ली कर लिए जाने के बाद कि मुठभेड़ मामले में सभी पहलुओं की उचित जांच हो चुकी है और जांच टीम की थ्योरी में कोई खामी नहीं हैं, उसके बाद एक पूरक आरोपपत्र दायर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी पहले ही सीबीआई अभियोजन विभाग की राय ले चुकी है लेकिन यदि निदेशक उनके विचारों से असहमति जताते हैं तो मामले को अटार्नी जनरल को भेजा जा सकता है।

 

सूत्रों ने बताया कि सीबीआई निदेशक चार आईबी अधिकारियों की भूमिका के संबंध में विभिन्न मुद्दों को देख रहे हैं जिन पर संदेह है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या वे अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी निभा रहे थे या किसी साजिश का हिस्सा थे, क्या उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी की आवश्यकता है, क्या सबूतों की कडिय़ां मुठभेड़ में अपराध की तरफ इशारा करती हैं या नहीं।

 

सूत्रों ने बताया कि जब निदेशक इन सभी बिंदुओं पर संतुष्ट हो जाएंगे , उसके बाद ही जांच एजेंसी मामले में पूरक आरोपपत्र दाखिल करेगी। इस मामले में 19 वर्षीय कालेज छात्रा इशरत जहां तथा तीन अन्य लोगों को गुजरात अपराध शाखा के अधिकारियों ने वर्ष 2004 में मार गिराया था।

 

उन्होंने बताया कि सीबीआई को अभी तक मुठभेड़ में मारे गए जीशान जौहर और अमजद अली राणा के बारे में कुछ अता पता नहीं चला है। गुजरात पुलिस का आरोप है कि वे लश्कर ए तैयबा के आतंकवादी थे जो भाजपा नेताओं की हत्या के इरादे से आए थे। एजेंसी ने इन दोनों की पहचान के लिए पाकिस्तान को न्यायिक अपील पत्र भेजा है लेकिन उसे इस पर जवाब मिलने की बहुत अधिक उम्मीद नहीं है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इससे जांच एजेंसी पूरक आरोपपत्र दाखिल करने से पीछे नहीं हटेगी।


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