मप्र के चुनाव नतीजों में डाक मतपत्रों की रहेगी अहम भूमिका

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Friday, December 06, 2013-10:48 AM

भोपाल: मध्यप्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में 18 से ज्यादा उम्मीदवारों की हार-जीत का अंतर एक हजार से कम मतों का रहा था, इस दफा हर विधानसभा क्षेत्र में औसतन एक हजार डाक मतपत्र पड़े हैं। इस लिहाज से एक हजार तक की हार जीत में डाक मतपत्रों की अहम भूमिका रहने वाली है। राज्य के 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए कुल तीन लाख 19 हजार कर्मचारियों को डाक मतपत्र जारी किए गए थे। इनमें से दो लाख 48 हजार कर्मचारी अपने डाक मतपत्रों का इस्तेमाल कर चुके हैं।

 

डाक मतपत्र आठ दिसंबर तक मतगणना शुरू होने से एक घंटे पहले तक पहुंचते रहेंगे, जिन्हें गणना में शामिल किया जाएगा। अब तक डाक मतपत्रों की संख्या को देखें तो एक बात तो साफ  हो जाती है कि औसत तौर पर हर विधानसभा क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा डाक मतपत्रों का इस्तेमाल हुआ है। वर्ष 2008 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में डाक मतपत्र का इस्तेमाल करने वालों की संख्या दो गुने से ज्यादा है।

 

राज्य में वर्ष 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में लगभग एक लाख 23 हजार डाक मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया था, जिनमें से जांच के बाद लगभग 98 हजार मतपत्र वैध पाए गए थे। इस चुनाव में राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 12 और कांग्रेस के छह उम्मीदवार एक हजार से कम के अंतर से जीते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में जीत का सबसे कम अंतर एक मत का धार जिले में रहा था, जहां से भाजपा की उम्मीदवार नीना वर्मा जीती थी, यह बात अलग है कि पांच वर्ष की न्यायालयीन लड़ाई के बाद न्यायालय ने कांग्रेस के उम्मीदवार बालमुकुंद गौतम को एक वोट से विजयी घोषित किया।

 

राज्य में विधानसभा चुनाव 2013 के लिए 25 नवंबर को मतदान हो चुका है और आठ दिसंबर को मतगणना होना है। इस चुनाव के नतीजां में भी डाक मतपत्र की अहम भूमिका रहने वाली है, क्योंकि यह चुनाव पिछले चुनाव के मुकाबले कहीं ज्यादा कश्मकश भरा है। कांग्रेस लेगातार डाक मतपत्रों की गिनती पर सवाल उठा रही है। दिल्ली में चुनाव आयोग से लेकर भोपाल में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी तक से मुलाकात कर अपनी आशंका को जाहिर कर चुकी है।

 

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सरकार पर मतगणना के दौरान सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का ओराप लगा चुके हैं। उन्होंने मतगणना की शुरुआत में ही डाक मतपत्रों की गिनती की मांग की है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रदेश सचिव बादल सरोज का कहना है कि कम मतों से होने वाली हार जीत में डाक मतपत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब सत्ता पक्ष का उम्मीदवार कम मतों से हारता है तो डाक मतपत्रों के जरिए ही जीत दिलाई जा सकती है। इसका उदाहरण नीना वर्मा की जीत और फिर हार है।

 

वहीं भाजपा लगातार इसे कांग्रेस की संभावित हार की बौखलाहट करार दे रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा है कि कांग्रेस चुनावी पराजय स्वीकार कर चुकी है। यही कारण है कि वह बार-बार आशंका व्यक्त कर रही है और चुनाव आयोग की चौखट पर पहुंचकर अपनी पराजित मानसिकता का प्रमाण दे रही है। चुनाव नतीजों में डाक मतपत्रों को लेकर अभी से जिरह का बाजार गर्म है, क्योंकि हार-जीत के कम अंतर के नतीजों में इन्हीं मतपत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका जो रहने वाली है।


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