शहीद की स्मृति में मां ने फिर लगाएंगी प्रदर्शनी

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Friday, December 06, 2013-12:12 PM

भोपाल: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने पुत्र कैप्टन देवाशीष शर्मा को खोने वाली निर्मला शर्मा शहीद पुत्र की स्मृति में प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी यहां मिट्टी से बनी आकर्षक कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाएंगी।

निर्मला शर्मा ने आज एक न्यूज एजेंसी को बताया कि इस बार प्रदर्शनी में बर्तन, प्याले, मग और बॉस्केट समेत लगभग 70 वस्तुएं प्रदॢशत की जाएंगी। सश सेना झंडा दिवस के मौके पर जिला सैनिक कल्याण बोर्ड परिसर में कल से प्रारंभ होने वाली प्रदर्शनी को ‘आकार.सुकुमार’ नाम दिया गया है। प्रति वर्ष की तरह इस बार भी प्रदर्शनी में इन वस्तुओं की बिक्री से होने वाली आय को ‘झंडा दिवस कोष’ में दान कर दिया जाएगा। प्रदर्शनी 11 दिसंबर तक चलेगी।

अपने इकलौते पुत्र की शहादत के बाद पति जितेंद्र कुमार शर्मा को भी खोने का दर्द उनके चेहरे पर पढा जा सकता है। जीवन के तमाम
उतार-चढाव देख चुकीं निर्मला शर्मा वर्षों से मिट्टी के बर्तनों और कलाकृतियों का निर्माण करती आ रही हैं। पति और पुत्र को खोने के
बाद कलाकृतियों को जीवन का मकसद बना लिया है।

कैप्टन देवाशीष शर्मा सेना की मेडिकल कोर में अधिकारी के तौर पर वर्ष 1994 में कश्मीर घाटी में तैनात थे। पंजाब रेजीमेंट की छब्बीसवीं बटालियन में तैनाती के वक्त कैप्टन शर्मा दस दिसंबर को डंगरपुर गांव में आतंकवादियों का मुकाबला करते वक्त शहीद हो गए थे। सेना के एक गश्ती दल पर हमले के बाद घायल जवानों के इलाज के लिए कैप्टन शर्मा पहुंचे थे। लेकिन वे स्वयं भी घायल हो गये।

अपनी परवाह किए बगैर कैप्टन शर्मा ने न सिर्फ अपने साथी जवानों का इलाज किया, बल्कि  स्वयं भी बंदूक थामकर शत्रुओं का मुकाबला
किया। कैप्टन शर्मा को मरणोपरांत ‘कीॢत चक्र’ से नवाजा गया। जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें सैन्य सेवा पदक प्रदान किया। थल सेना
अध्यक्ष ने इस अधिकारी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया था।

केंद्रीय विद्यालयों में अर्थशा की शिक्षिका रह चुकी निर्मला शर्मा के यहां स्थित निवास पर सेरेमिक कलाकृतियों के निर्माण के लिए एक
वर्कशाप भी है। पति की स्मृति में निर्मला शर्मा ने उनकी अनेक कविताओं को बर्तनों पर उकेरा है। निर्मला शर्मा भी होशंगाबाद के केंद्रीय विद्यालय से प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत हुए थे। निर्मला शर्मा ने अपने पुत्र के साथ बचपन में बिताए पलों को अपनी कविताओं ‘छोट सा हाथ’ और ‘फूलों की घाटी’ में दर्ज किया है।

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