बांध परियोजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया से जुड़ी खामियों का खुलासा

  • बांध परियोजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया से जुड़ी खामियों का खुलासा
You Are HereNational
Friday, December 06, 2013-1:57 PM

ईटानगर: एक रिपोर्ट के अनुसार नदियों पर बांध और जलविद्युत परियोजनाओं विशेषकर उत्तरपूर्व में इस तरह की परियोजनाओं के निर्माण के लिए वैधानिक मंजूरी के प्रावधानों को तोड़ा मरोड़ा जा रहा है और पर्यावरण से जुड़े अनिवार्य सुरक्षा उपायों की अकसर उपेक्षा की जा रही है। 

उत्तराखंड में हाल में आए भीषण बाढ़ से बांधों विशेषकर हिमालयी क्षेत्र में बांधों के अंधाधुंध निर्माण के खतरे सामने आए थे। जल के उचित प्रबंधन की वकालत करने वाले दुनिया के सबसे बड़ी गैर सरकारी संगठन, कैलिफोर्निया स्थित ‘इंटरनेशनल रीवर्स नेटवर्क’ के लिए तैयार की गयी इस रिपोर्ट में पर्यावरण कार्यकर्ता उर्मी भट्टाचार्य ने भारत में बांधों को किस तरह मंजूरी मिलती है, इसके बारे में बताया है।

‘‘डैम प्लानिंग अंडर दि स्पॉटलाइट : ए गाइड टू डैम सैंक्शनिंग इन इंडिया’’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कैसे निर्माण एजेंसियां नौकरशाही की उलझनों को दूर करने के लिए नियमों में हेरफेर करती हैं। रिपोर्ट में बांध की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की गयी है।

भट्टाचार्य ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘हिमालयी क्षेत्र में बांध निर्माण के सभी पक्षों को अब तक पूरी तरह समझा नहीं गया है और खतरों का पूरी तरह ध्यान नहीं दिया जाता। अपर्याप्त अध्ययन, विशेषज्ञता की कमी और बांध निर्माण में हड़बड़ी, हालत को और बिगाड़ देते हैं।’
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You