लोकसभा चुनाव की कमान अखिलेश के नहीं अपने हाथों में रखेंगे मुलायम!

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Saturday, December 07, 2013-2:20 PM

लखनऊ: लोकसभा के आगामी चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) की लगी होर्डिंग्स में केवल पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के चित्र होने के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को फिलहाल प्रचार के लिए मुख्य चेहरा बनाने नहीं जा रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जगह-जगह लग रही सपा की होॄडग्स में केवल पार्टी अध्यक्ष का चित्र बना है और उसके साथ केवल एक नारा मन से हैं मुलायम लेकिन इरादे लोहा हैं ही लिखा है। इससे लगता है कि मुलायम लोकसभा चुनाव की कमान अपने हाथ में ही रखेंगे। उत्तर प्रदेश में गत विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव हालांकि पार्टी का युवा चेहरा बनकर उभरे थे और माना जाता है कि इसीलिए पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों से उनकी छवि खराब हुई जिसे उन्होंने विधानसभा में यह कहकर स्वीकारा था दंगों के दाग उन पर ताउम्र रहेंगे।

लोकसभा की उत्तर प्रदेश में 80 सीटें हैं जिसमें से अधिक से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रहे मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा चुनाव की कमान फिलहाल अपने हाथों में ले ली है। हाल ही में प्रदेश पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों की बुलायी बैठक में मुलायम ने एक मंत्री पर कड़ी नाराजगी जतायी थी और कुछ को सुधरने के लिए आगाह किया था। समय-समय पर मुलायम मुख्यमंत्री और अपने पुत्र अखिलेश यादव को भी फटकार लगाई। एक बार तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह यदि मुख्यमंत्री होते तो 15 दिन के अन्दर कानून व्यवस्था दुरुस्त कर देते। कानून-व्यवस्था को लेकर वह अक्सर अपनी ही पार्टी की सरकार की खिंचाई करने से नहीं चूकते। सपा नेता के मुताबिक मुलायम ने कई सभाओं में इस बात को जाहिर किया है कि प्रदेश की जनता ने 2012 में उन्हें वोट दिया लेकिन प्रदेश की बागडोर अखिलेश यादव को सौंपने का निर्णय उन्हीं का था।

उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य में जनता की उम्मीदों पर खरा न उतरने की विफलता का असर 2014 लोकसभा चुनाव पर नहीं पडऩा चाहिए हालांकि वह बीच-बीच में यह भी कहते हैं कि सपा सरकार से बेहतर कोई सरकार नहीं है। माना जा रहा है कि उन्होंने एक बार फिर अपना चेहरा आगे कर ही चुनाव मैदान में उतरने की पहल की है। पार्टी के आलोचकों का भी यही मानना है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार की कानून-व्यवस्था को बनाये रखने में नाकामी लोकसभा चुनावों में नकारात्मक असर डालेगी। जानकारों की मानें तो सपा के प्रति मुस्लिमों का झुकाव सिर्फ मुलायम के कारण है।


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