Birthday special: बॉलीवुड के ‘हीमेन’ को जन्मदिन मुबारक

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Sunday, December 08, 2013-12:57 PM

मुंबई: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दीवाना बनाने वाले को अपने सिने करियर के शुरूआती दौर में वह दिन भी देखना पड़ा था जब निर्माता-निर्देशकों ने उन्हें अभिनेता के काबिल समझकर गांव वापस लौट जाने की सलाह दे रहे थे। पंजाब के फगवारा में 8 दिसंबर 1935 को जन्मे धमेन्द्र का रूझान बचपन के दिनों से ही फिल्मों की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे। फिल्मों की ओर उनकी दीवानगी का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि फिल्म देखने के लिए वह मीलो पैदल चलकर शहर जाते थे।

फिल्म अभिनेत्री सुरैय्या के वह इस कदर दीवाने थे कि उन्होंने वर्ष 1949 में प्रदर्शित फिल्म ‘दिल्लगी’ चालीस बार देख डाली थी। वर्ष 1958 में फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर पत्रिका फिल्म फेयर का एक विज्ञापन निकाला जिसमें नए चेहरों को बतौर अभिनेता काम देने की पेशकश की गई थी। धमेन्द्र इस विज्ञापन को पढ़कर काफी खुश हुए। वह टयूबबैल में नौकरी को छोड़कर अपने सपनों को साकार करने के लिए मायानगरी मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद धमेन्द्र को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

फिल्म इंडस्ट्री में बतौर अभिनेता काम पाने के लिये वह स्टूडियों दर स्टूडियों भटकते रहे। वह जहां भी जाते उन्हें खरी खोटी सुननी पड़ती। धमेन्द्र चूंकि विवाहित थे अत कुछ निर्माता उनसे यह कहते कि यहां तुम्हे काम नहीं मिलेगा। कुछ लोग उनसे यहां तक कहते तुम्हें अपने गांव लौट जाना चाहिए और वहां जाकर फुटबॉल खेलना चाहिए लेकिन धमेन्द्र उनकी बात को अनसुना करके अपना संघर्ष जारी रखा।


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