दल-बदलुओं को भी दिल्लीवासियों ने नकारा

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Monday, December 09, 2013-12:51 PM

नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): दिल्ली विधानसभा चुनाव में दल बदलकर फिर से अपनी विधायकी बचाने के जुगाड़ में लगे दल-बदलुओं को जनता ने नकार दिया है। हरिनगर से चार बार विधायक रहे भारतीय जनता पार्टी के हरिशरण सिंह बल्ली ने पार्टी से टिकट न मिलने पर कांग्रेस का दामन थामा था और उन्हें करारी हार का स्वाद चखना पड़ा।

यहां आप के जगदीप सिंह ने बाजी मारी। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के श्याम शर्मा को 8,846 मतों से परास्त किया। मजे की बात यह रही कि शर्मा भी बीजेपी के पार्षद थे और उन्होंने अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। आप के मुकाबले बल्ली को 15 हजार 801 कम मत मिले। पिछले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विजयी हुए राम सिंह नेताजी ने चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दामन थामा था। नेताजी का मुकाबला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए रामसिंह विधूड़ी से था।

विधूड़ी ने नेताजी को 13, 854 वोटों से हराया। गोकुलपुर विधानसभा क्षेत्र से पिछले चुनाव में बीएसपी के टिकट पर जीते सुरेंद्र कुमार को इस बार पार्टी ने टिकट देकर वापस ले लिया था। इससे नाराज होकर वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतरे। उन्हें बीजेपी के रणजीत सिंह से 1,922 वोटों से पराजय झेलनी पड़ी। बीएसपी के चौधरी बलराज यहां पांचवें स्थान पर रहे।

बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हर्षवर्धन के खिलाफ  चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का हाथ थामने वाले बीजेपी के पूर्व पार्षद डॉ.वी. के. मोगा को भी क्षेत्र की जनता ने नकार दिया। मोगा को हर्षवर्धन से 40 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा। दल बदलकर चुनाव लडऩे वाले प्रमुख उम्मीदवारों में केवल कांग्रेस के उम्मीदवार आसिफ  मोहम्मद खान रहे हैं। वह पिछली बार ओखला सीट से राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे। वे चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे और उन्होंने इस बार भी जीत दर्ज की है।


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