आप ने बटोरे कांग्रेसी वोट

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Monday, December 09, 2013-1:16 PM

नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): आप की झाडू़ ने कांग्रेस के सभी समीकरणों को धो दिया है। कांग्रेस ने अवैध बस्तियों व पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वालों,कमजोर तबके व मुस्लिमों के वोट पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया। शीला दीक्षित सरकार 895 अवैध कॉलोनियों को ठीक चुनाव के पहले नियमित करने का दांव चलकर गत चुनावों का इतिहास दोहराने में बुरी तरह नाकाम रही।

अवैध कॉलोनियों से भरमार वाले तिमारपुर, अम्बेडकर नगर, बुराड़ी, कोंडली, देवली व सीमापुरी जैसे एक दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां आप पार्टी ने कांग्रेस को बुरी तरह पटकनी दी। मुस्लिम वोटों का भरपूर लाभ लेने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस ने चार मुस्लिम प्रत्याशी उतारे, लेकिन 19 सीटों पर निर्णायक स्थिति में होने के बावजूद कांग्रेस मुस्लिमों को अपनी तरफ खींचने में नाकाम रही। यह पहला मौका था जब दिल्ली का मुसलमान पूरी तरह खामोश था। अंदरखाने मुसलमानों पर मुजफ्फरनगर दंगों का भारी असर पड़ा है।

मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के मामले में केंद्र की स्पष्ट नीति न होने से वे दुखी थे। वर्ष 2009 तक कांग्रेस ने मुसलमानों के हितों में चार काम किए। इसमें सच्चर कमेटी का गठन, मिश्रा आयोग का गठन, अल्पसंख्यकों के लिए अलग से मंत्रालय का सृजन और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए वजीफे की घोषणा करना है। इसीलिए वर्ष 2009 में मुस्लिमों ने फिर कांग्रेस को चुना। लेकिन इस बार उनकी नाराजगी भारी पड़ गई।

अधिक मतदान ने डुबोई कांग्रेस की लुटिया
दिल्ली में हुए रिकॉर्डतोड़ मतदान ने कांग्रेस की लुटिया डुबोने का काम किया है। जिन 6 सीटों प 70 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था उनमें से कांग्रेस महज एक सीट पर जीत दर्ज कर पाई है। सर्वाधिक मतदान वाली 6 सीटों में से चार पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा किया है। मुस्तफाबाद से विधायक हसन अहमद ऐसे अकेले कांग्रेसी विधायक हैं, जिन्होंने अधिक मतदान वाली सीट पर कब्जा जमाया है।


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