कांग्रेस के सांसदों की प्रतिष्ठा हुई तार-तार

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Monday, December 09, 2013-1:26 PM

नई दिल्ली (कुमार गजेन्द्र): दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों ने कांग्रेस के सातों सांसदों की प्रतिष्ठा तार-तार कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि नई दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली व दक्षिणी दिल्ली 3 लोकसभा सीटों में से एक भी कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया। वहीं पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली से केवल 2-2 व चांदनी चौक व उत्तर पश्चिमी दिल्ली से मात्र 1-1 सीट कांग्रेस की झोली में आई।

पूर्वी दिल्ली सीट से तो मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित खुद सांसद हैं और पार्टी यहां से अच्छे परिणामों की अपेक्षा कर रही थी। इसका एक कारण यह भी था, कि यहां कई विधायक ऐसे थे, जो पिछले कई चुनावों को जीतते आ रहे थे। अरविंदर सिंह लवली, डॉक्टर ए.के. वालिया, डॉक्टर नरेन्द्र नाथ, नसीब सिंह, अमरीश गौतम को इस इलाके से दिग्गज माना जाता था।

ये 1993 में भाजपा की लहर में भी जीतकर विधानसभा पहुंचे थे लेकिन इस बार के चुनावों में केवल अरविंदर सिंह लवली ही अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। बाकी सभी दिग्गज आम आदमी पार्टी के सैलाब में बहते दिखाई दिए।

पूर्वी दिल्ली के नतीजों ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को दोहरी शिकस्त दी है। एक तो वह खुद नई दिल्ली सीट से चुनाव हार गईं। दूसरे पूर्वी दिल्ली सीट पर पार्टी की इतनी बुरी हार ने संदीप दीक्षित की मजबूती को हिलाकर रख दिया है। ओखला सीट से जीते आसिफ मोहम्मद खान ने इसी विधानसभा में कांग्रेस का दामन थामा है।

इसकी तरह उत्तर-पूर्वी जिला में पार्टी मात्र 2 सीटों सीलमपुर मतीन अहमद और मुस्तफाबाद हसन अहमद ही जीत पाए लेकिन यहां जीतने वाले दोनों प्रत्याशी मुस्लिम समाज से आते हैं, इस जीत में पार्टी का कोई जलवा नही है। यहां से सांसद और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल भी पूरी तरह से अपनी लोकसभा सीट पर जादू चलाने में नाकामयाब रहे। अग्रवाल निगम चुनावों में टिकट बंटवारे और फिर पार्टी की हार के भी जिम्मेदार थे लेकिन पार्टी ने दोबारा उन पर विश्वास किया था। जो पार्टी की बड़ी गलती रही है।

चांदनी चौक लोकसभा सीट पर कपिल सिब्बल पूरी तरह से विफल रहे हैं। उनके इलाके में मात्र दो विधायक प्रहलाद सिंह साहनी और बल्लीमारान से हारून यूसुफ ने चुनाव जीता   लेकिन इस जीत में कपिल सिब्बल का कोई हाथ नहीं माना जा सकता। हारून सरकार में मंत्री रहे हैं और इलाके में उनकी अच्छी छवि है। वहीं प्रहलाद सिंह साहनी अपनी अपनी छवि के कारण जीते हैं।

उत्तर-पश्चिमी लोकसभा सीट से कृष्णा तीरथ सांसद हैं, जो विफल रही हैं। उनके इलाके में मात्र एक ही सीट बादली देवेन्द्र यादव जीत पाए। देवेन्द्र की अपनी छवि रही है। जो उनकी जीत का कारण रहा है। आकलन के हिसाब से नई दिल्ली लोकसभा सीट से अजय माकन पूरी तरह से विफल रहे हैं। पश्चिमी दिल्ली से पूर्वांचली नेता महाबल मिश्रा दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट से रमेश कुमार एक भी सीट नहीं जीत पाए। 


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