...तो दिल्ली में लागू हो सकता है राष्ट्रपति शासन

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Monday, December 09, 2013-2:53 PM

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के परिणामों के बाद त्रिशंकू स्थिति और प्रमुख राजनीतिक दलों की एक दूसरे का समर्थन नहीं देने की घोषणा के बाद राजधानी में राष्ट्रपति शासन लागू होने के आसार बनने लगे हैं। दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के इतिहास में पहला मौका है जब त्रिशंकू सदन की स्थिति सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 31 सीटों के साथ सबसे बडी पार्टी के रूप में उभरी है। उसके सहयोगी अकाली दल को एक सीट मिली है। इस प्रकार भाजपा के पास 32 विधायक हैं लेकिन बहुमत के लिए कम से कम 36 के आंकड़ें की जरूरत है जो मौजूदा परिस्थिति में नजर नहीं आ रही है।

 

सामाजिक आंदोलन के बाद एक साल पहले बनी आम आदमी पार्टी (आप) ने 28 सीटें हासिल कर दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा के सभी समीकरणों को बिखेर कर रख दिया। कांग्रेस आठ सीटों पर सिमट गई। एक निर्दलीय और एक सीट जनता दल (यू) के खाते में गई है। आप लगातार यह कह रही है कि वह न तो किसी भी दल को समर्थन देगी और न ही किसी से सहयोग लेकर सरकार बनाएगी।

 

परिणामों के बाद आप ने कहा है कि जनता ने उसे विपक्ष में बैठने का आदेश दिया है। इसलिए सरकार बनाने के लिए किसी प्रकार का गठजोड़ नहीं करेगी और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी। आप का कहना है कि सबसे अधिक सीटें भाजपा को मिली हैं और उसे सरकार बनाना चाहिए। यदि वह चाहती है तो सरकार बनाए लेकिन हम किसी प्रकार का सहयोग नहीं देंगे।


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