ऐसी जीत हर्षवर्धन ने भी न सोची थी

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Monday, December 09, 2013-3:15 PM

नई दिल्ली (धनंजय कुमार): दिल्ली में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डॉ. हषवर्धन नाम के साथ सीएम सिंबल का ही असर था कि उन्होंने इस विधानसभा चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज कर सबसे अधिक मतों से जीतने वाले प्रत्याशियों में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। हर्षवर्धन की जीत पर एक समय तो पार्टी आलाकमान को भी संदेह होने लगा था और यही वजह था कि पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल ने पूरी दिल्ली का भ्रमण छोड़ अपने विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा समय देने की सलाह दी थी।

हर्षवर्धन की इस अप्रत्याशित जीत की चर्चा सभी राजनीतिक पार्टियों व राजनीतिक विशेषज्ञों में काफी तेज है। उनका कहना है कि यदि हर्षवर्धन के साथ यही सीएम पद के उम्मीदवार होने का सिंबल नहीं लगा होता तो चुनाव परिणाम कुछ और भी हो सकते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में महज 3204 मतों से जीत दर्ज करने वाले हर्षवर्धन के सामने इस बार बड़ी कठिन चुनौती थी। क्योंकि इस बार हर्षवर्धन का मुकाबला कभी उनके ही पसंदीदा और कट्टर भाजपाई नेता डॉ. वी.के. मोंगा से हो रहा था।

निगम चुनाव में टिकट कटने तथा विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की धूमिल हुई उम्मीद के बाद डॉ. मोंगा ने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें कृष्णा नगर से डॉ. हर्षवर्धन के खिलाफ उतारा था। साथ ही बीते 30 नवम्बर को आयोजित रैली में नरेंद्र मोदी ने खुले मंच से यमुनापार से मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर हर्षवर्धन के  पक्ष में वोट करने की अपील की थी। युवाओं की पसंद माने जा रहे मोदी की अपील और रैली का भी असर था कि उन्हें इतने भारी मतों से जीत मिली। ऐसी जीत हर्षवर्धन ने भी न सोची थी


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