इंदिरा गांधी की तरह ‘मजबूत और निर्णायक’ नेता चाहते हैं : शरद पवार

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Monday, December 09, 2013-5:45 PM

नई दिल्ली: चार राज्यों में विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर करारा प्रहार करते हुए संप्रग के सहयोगी दल राकांपा के मुखिया शरद पवार ने आज कहा कि लोग ‘‘कमजोर शासक नहीं चाहते’’ बल्कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह ‘मजबूत और निर्णायक’ नेता चाहते हैं और युवाओं ने अपने मतों के जरिए अपने गुस्से का इजहार किया है।

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का आधार काफी सिमटने पर गौर करते हुए उन्होंने कहा कि चुनावों ने सवाल खड़े किए हैं जिसपर ‘‘न सिर्फ कांग्रेस को बल्कि हम सबको गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।’’ पवार संप्रग के पहले नेता हैं जिन्होंने चार राज्यों में कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद अपने मन की बात सामने रखी है। 

पवार ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘लोग मजबूत, निर्णायक और परिणामोन्मुख नेता चाहते हैं। वे कमजोर शासक नहीं चाहते बल्कि ऐसा नेता चाहते हैं जो गरीबों के लिए नीतियां और कार्यक्रम तैयार करे और उसे दृढ़ता के साथ लागू करे।’’ उन्होंने कहा कि युवाओं ने इस चुनाव में बड़ी भूमिका अदा की जिसकी वजह से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘नयी पीढ़ी ने -मतों के जरिए अपने गुस्से का स्पष्ट संकेत दे दिया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे ऐसा नेता चाहते हैं जो अपने रख और नीतियों के बारे में निर्णायक हो, जो लोगों को लाभान्वित करे और इस तरह की नीतियों को शुरू करने में नहीं हिचकिचाए।’’

पवार ने आगाह किया कि जब शासकों में इस तरह के आत्मविश्वास का अभाव होता है तो सत्ता के अन्य केंद्रों के पैदा होने की संभावना हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह विधानसभा चुनावों के नतीजे से बड़ा सबक है।’’उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तरों पर कुछ समय से कमजोर नेतृत्व के कारण ‘छद्म कार्यकर्ताओं’ की एक भीड़ जमा हो गई है, जिनका जमीनी हकीकतों से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह देखा गया है कि न सिर्फ मीडिया बल्कि सरकार में भी लोग इन लोगों से प्रभावित हो जाते हैं। वे गैर यथार्थवादी विचारों के साथ आते हैं और ऐसी धारणा पैदा की जाती है कि वे जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो सही नहीं है।’’ 73 वर्षीय मराठा नेता ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन यह स्पष्ट है कि राकांपा प्रमुख संप्रग का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी के मौजूदा नेतृत्व के बारे में अपनी राय जाहिर कर रहे थे। पवार ने 1999 में कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। 

उन्होंने जोर दिया कि जब भी मजबूत और निर्णायक नेतृत्व होता है तो इस तरह की शक्तियां सामने नहीं आती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण लें। वह मजबूत और निर्णायक थीं। उन्होंने बैंकों के राष्ट्रीयकरण या प्रिवी पर्स को खत्म करने जैसे साहसिक फैसले किए जिसे उन्होंने दृढ़ता के साथ लागू किया।’’


 


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