संसद पर सवाल, यूपीएससी क्यों रोक रहा गरीबों को

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Tuesday, December 10, 2013-11:30 AM

नई दिल्ली: यूपीएससी के नए पैटर्न को लेकर करीब एक साल से चला आ रहा विरोध सोमवार को चौतरफा चर्चा का केंद्र बन गया। अब तक चल रहे विरोध स्वरूप से अलग सोमवार को यूपीएससी कैंडिडेट का एक दल संसद भवन के विजय चौक फाउंडेशन के बिल्कुल पास पहुंच गया।

जब तक पुलिस मामले को समझ पातें, छात्रों का विरोध दर्ज हो चुका था। अरबी-फारसी को शामिल करने और परीक्षा पैटर्न में बदलाव के कारण प्रभावित हुए कैंडिडेट को तीन अधिक मौके देने की छात्रों की मांग उनके पोस्टर-बैनर के जरिए दूर तक पहुंच चुकी थी।

हालांकि इसके तुरंत बाद पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया और छात्रों को बस से थाने ले गई। प्रदर्शन के बाद नवोदय टाइम्स से बातचीत में जेएनयूएसयू के अध्यक्ष अकबर चौधरी ने कहा कि यह विरोध नया नहीं है। एक साल से विरोध हो रहा है, सरकार को सुनना होगा। उन्होंने कहा कि हमने कई सांसदों को भी यूपीएससी पैटर्न में बदलाव से आम छात्रों को होने वाले नुकसान के बारे में बताया। लेकिन बावजूद छात्रों की मांग नहीं सुने जाने के कारण हमने यह तरीका अपनाया।

अकबर ने कहा कि प्रदर्शन में डीयू, जेएनयू के अलावा मुखर्जीनगर के भी काफी छात्रों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने यूपीएससी के नए पैटर्न को गरीबों के लिए नई रुकावट करार दिया। यूपीएससी ने हालिया बदलाव के तहत एप्टीट्यूड टेस्ट को शामिल किया है जबकि ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में अरबी-फारसी भाषा को हटा दिया है।

छात्रों का तर्क है कि एप्टीट्यूड टेस्ट से गरीब और पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों को मुश्किलें होंगी। छात्रों की मांग है कि जिन छात्रों ने पहले ही दो बार एग्जाम दे चुके हैं उन्हें इस बदलाव के बाद नए सिरे से तैयारी करनी होगी। इसलिए उन्हें तीन और मौके दिए जाए।


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