चंबल में नहीं जमी सिंधिया की धाक

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Tuesday, December 10, 2013-2:43 PM

ग्वालियर: मध्यप्रदेश विधानसभा के हाल ही संपन्न चुनाव में चली ‘शिवराज सिंह चौहान लहर’ ग्वालियर चंबल क्षेत्र में आजादी से पूर्व से दशकों से कायम सिंधिया राजवंश के आधार पर आघात पहुंचाने में कामयाब रही है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया की विरासत को उनके असमय निधन के बाद उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बखूबी संभाला लेकिन हाल ही संपन्न विधानसभा चुनावों में उनका जबरदस्त प्रचार अभियान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘शिवराज लहर’ के आगे कारगर नहीं साबित हुआ और उनके करीबी कहे जाने वाले एक दर्जन से अधिक धुरंधर नेताओं को चुनावों में मुंह की खानी पड़ी।

 

हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ एवं ग्वालियर की सांसद यशोधरा राजे और सिंधिया परिवार की संबंधी माया सिंह जीतने में कामयाब रहीं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि ये दोनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर मैदान में थीं इसलिए उनकी जीत में शिवराज लहर का योगदान रहा।

 

ग्वालियर चंबल क्षेत्र में विधानसभा की 34 सीटें हैं। बताया जाता है कि कांग्रेस एक दफा छोड़ कर उत्तर पश्चिमी मध्यप्रदेश की इन 34 में से कभी भी आधी से अधिक सीटें नहीं जीत पाई। वर्ष 2008 में कांग्रेस को 13, भाजपा को 16, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के चार और भारतीय जनशक्ति को एक सीट मिली थी जो बाद में भाजपा में शामिल हो गया था।


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