भाजपा कार्यकर्ताओं पर चढ़ा नमों का सरूर तो कांग्रेसियों में बगावत का नशा

  • भाजपा कार्यकर्ताओं पर चढ़ा नमों का सरूर तो कांग्रेसियों में बगावत का नशा
You Are HereNational
Wednesday, December 11, 2013-10:29 AM

देहरादून: दिल्ली समेत चार राच्यों में हुई भाजपा की जीत के तुरंत बाद उत्तराखंड में हो रही मोदी की शंखनाद रैली को लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं में जहां एक ओर नमो का जुनुन चढ़ा हुआ है तो वही दूसरी ओर भाजपा इस रैली को अभी तक की सबसे बड़ी रैली बनाने के लिए भीड़ जुटाने में लगी है। हालात यह है कि भाजपा इस रैली की तैयारियों को लेकर कोई भी कोर कसर छोडऩा नही चाहती है। वही दूसरी ओर कांग्रेस का चुनाव परिणाम के बाद जो मनोबल गिरा है उसको अब धीरे धीरे कार्यकर्ता बाहर निकालने लगे है।

इसके लिए वे एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा अंदरूनी कलह साफ दर्शा रहे है। हालात यह हो गए है कि कांग्रेस ने कभी भी बगावत का झंडा खड़ा हो सकता है। ऐसा नहीं कि राज्य में भाजपा के भीतरखाने में कलहबाजी न होती हो। मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर इन तेरह सालों में भाजपा की अंदरूनी कलह भी सामने आ चुकी थी। हालांकि इन दिनों भले ही चार राज्यों के चुनावी नतीजों को लेकर राज्य के भाजपाईयों में उत्साह ही उत्साह दिख रहा हो। कार्यकर्ता तो कार्यकर्ता, वरिष्ठ दिग्गज भी एक दूसरे की हां में हां मिलाते दिख रहे। साफ है कि चुनावी नतीजे पक्ष में आने पर ही यह खुशी झलक रही है, अन्यथा हालात ‘उधर’ वाले होते। राज्य कांग्रेस की बात करें तो यहां प्रदेश अध्यक्ष की पद में काबिज यशपाल आर्य अपना इस्तीफा दे चुके हैं।

दिल्ली दरबार की ओर से जब इस्तीफा स्वीकार न करने और पद पर बने रहने का फरमान आया तो सभी ने सोचा कि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के बाद इस पर फैसला लिया जा सकेगा। इस पर क्या फैसला आएगा, अभी सिर्फ तुक्का ही लगाया जा सकता है। जबकि साफ है कि हाईकमान अभी सिर्फ चुनावी नतीओं को लेकर मंथन कर रहा होगा। एक अनार और सौ बीमार वाली कहावत राजनीति में सटीक बैठती है। प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की घोषणा के बाद से ही हाईकमान के दरबार में आला राजनेताओं की अपनी दावेदारी को लेकर जुटने की चर्चा रही थी। हालांकि जैसा कि माना जा रहा था कि इस्तीफा स्वीकार करने पर राज्यों में होने वाले चुनाव मतदाताओं पर बुरा असर जा सकता था। चुनाव नतीजे आज देश के सामने हैं, जिसमें कांग्रेस को कम ही लोगों ने चाहा है। देश की जनता का यह फैसला दिल्ली दरबार के लिए चौंकाने वाला हो सकता है।

साथ ही राज्य के कांग्रेसियों के लिए  बौखलाहट बढ़ाने वाला कहा जा रहा। पहले जरा-जरा सी बात को बड़ी बनाकर कुर्सी खेवनहारों की नींद उड़ाने वालों को तो मानों प्रहार करने का मौका मिल गया हो। एक तो राज्य में दैवीय आपदा के बाद राहत बांटने में हीलाहवाली का आरोप लगा। जिससे उबरने में जुटी राज्य सरकार को अब जनता के हितों की अनदेखी करना भयंकर भारी प्रतीत हो रहा होगा। यह वही जनता है जो कि यदि सिर पर बैठाना जानती है तो उंगलियां पर नचाना भी। साफ है कि राज्य कांग्रेस के सामने इन चुनावी नतीजों ने मुश्किल बढ़ाई है। इससे पार पाने को रास्ता तलाशना होगा, वह भी बड़ी जल्द, अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।
 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You