आंध्र प्रदेश विधानसभा शीतकालीन सत्र में छाया रहेगा राज्य के विभाजन का मुद्दा

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Wednesday, December 11, 2013-10:59 AM

हैदराबाद: अगर आंध्र प्रदेश को बांटने की केंद्र सरकार की योजना मूर्त रूप लेती है तो कल से शुरू हो रहा आंध्र प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र ‘एकीकृत’ आंध्र प्रदेश का अंतिम सत्र हो सकता है। राज्य विधायिका विशेषकर राज्य विधानसभा के समक्ष संभावित एजेंडा आंध्र प्रदेश मसौदा पुनर्संगठन विधेयक-2013 पर बहस कराना होगा जिसे राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद के तहत ‘‘विचार व्यक्त’’ करने के लिए भेजा है। केंद्र के फैसले को लेकर राज्य के क्षेत्रीय विभाजन से जुड़े दोनों पक्षों में जारी नाराजगी एवं रोष को देखते हुए गर्मा गर्म बहस होने की संभावना है।

 

मसौदा पुनर्संगठन विधेयक पर बहस के अंत में किसी तरह का मतदान नहीं होगा लेकिन विधायिका से जुड़े सू़त्रों ने कहा कि इसके बावजूद भी यह स्पष्ट हो जाएगा कि इसे कितना समर्थन मिला और कितनों ने इसका विरोध किया। हालांकि इस गिनती का राज्य के विभाजन को लेकर केंद्र के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने केंद्र सरकार को खुलेआम चुनौती दी है कि वह विधानसभा में मसौदे के ‘‘खारिज’’ होने के बाद विधेयक संसद में पारित कराए।


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