समलैंगिकता पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय से समलैंगिक कार्यकर्ता निराश

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Wednesday, December 11, 2013-12:30 PM

नर्इ दिल्ली: भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर करने संबंधी याचिका सबसे पहले दायर करने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने समलैंगिक संबंधों को दंडनीय अपराध बनाने के प्रावधान की संवैधानिक वैधता बहाल रखने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर आज असंतोष व्यक्त किया।

एनजीओ नाज फाउंडेशन की ओर से मामला पेश करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने फैसले के बाद कहा, ‘‘ हम निर्णय से निराश है। हमें लगता है कि यह निर्णय कानून के लिहाज से सही नहीं है। हम उचित कानूनी मदद लेंगे।’’न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने दिल्ली उ‘च न्यायालय के 2009 में दिए गए उस फैसले को दरकिनार कर दिया है जिसमें समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था।


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