समलैंगिकता अप्राकृतिक, तो ब्रम्हचर्य क्या है?

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Wednesday, December 11, 2013-11:02 PM

नई दिल्ली (सज्जन चौधरी):  सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक सेक्स को अप्राकृतिक मानते हुए इसे एक अपराध माना है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले खिलाफ देश भर के समलैंगिकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

समलैंगिकों ने सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया है कि अगर गे-सैक्स अप्राकृतिक है तो ब्रम्हचर्य क्या है? जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में पहुंचे समलैंगिकों ने प्रदर्शन के दौरान सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार चाहे तो एक आॢडनैंस लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट सकती है। पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है।

प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए समलैंगिकों की मांग थी कि एससी/एसटी एक्ट की तर्ज पर उनके लिए भी सख्त से सख्त कानून बनाया जाए। जिससे समाज में उनके प्रति फैली नफरत और जिल्लत को समाप्त किया जा सके।

गौरतलब है कुछ दिनों पहले भी जंतर-मंतर पर समलैंगिकों ने परेड निकाल कर सरकार के सामने अपनी मांगे रखी थी। समलैंगिकों के लिए देश भर में हो रहे राष्ट्रीय जनांदोलनों के संयोजक भाई विमल ने धारा 377 को वापस लेने की मांग की। उन्होंने विशेष आॢडनैंस के जरीए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने वर्षों पहले शाहबानो केस का हवाला देते हुए कहा कि सरकार अगर चाहे तो क्या नहीं कर सकती।

वहीं दूसरी ओर जंतर-मंतर पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर हमारे हक के लिए सरकार कानून नहीं बना सकती तो, इसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा। ज्यादातर प्रदर्शनकारियों के मन में सरकार की नीतियों और कानूनों के प्रति खासा गुस्सा था। उनका कहना था कि यह हमारे मानवाधिकारों का हनन है। आने वाले दिनों में अपने हक के लिए जमकर लड़ाई लड़ी जाएगी।


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