समलैंगिकों के अधिकारों के पक्ष में खड़ी हुईं सोनिया

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Thursday, December 12, 2013-2:59 PM

नई दिल्ली: राजनीतिक साहस का परिचय देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज समलैंगिकता को अपराध के दायरे में रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर निराशा जाहिर की और समलैंगिकों को इंसाफ दिलाने के लिए संसद से इस मुद्दे का समाधान करने की आशा व्यक्त की।

समलैंगिकता का अपराध मानने वाले कानून को गांधी ने पुरातन, दमनकारी और अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे समाप्त करने का दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला बुद्धिमत्तापूर्ण था क्योंकि यह हमारे संविधान में प्रदत्त मौलिक मानवाधिकारों को प्रभावित
करता था।

एक बयान में गांधी ने कहा उच्चतम न्यायालय ने हमें एक रास्ता सुझाया है। मुझे उम्मीद है कि संसद इस मुद्दे को लेगी और इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होने वालों समेत देश के सभी नागरिकों के जीवन और उनकी स्वाधीनता को सुनिश्चित करेगी।

उच्चतम न्यायालय ने कल उच्च न्यायालय के उस फैसले का खारिज कर दिया था। जिसमें समलैंगिकता को अपराध मुक्त किया गया था। यह फैसला आने के बाद इस ज्वलंत सामाजिक मुद्दे पर एक बार फिर जोरदार बहस छिड गई है। राजनीतिक दलों ने कल सावधानी भरी प्रतिकिया जाहिर की थी लेकिन अब कांग्रेस अध्यक्ष के साहसी बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक स्वर बुलंद होने की उम्मीद है।

गांधी ने अपने बयान में कहा कि भारत के संविधान की महान परंपरा है और खुलापन एवं उदारता हमारी विरासत है। यह परंपरा किसी भी प्रकार के भेदभाव को नहीं मानती। उन्होंने कहा हमें इस बात पर गर्व है कि हमारी संस्कृति हमेशा सहिष्णु और समावेशी रही है।

गांधी ने कहा मुझे उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से निराशा हुई है जिसमें समलैंगिको के अधिकारों से जुडे मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को पलट दिया गया।




 


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