शीला दीक्षित के आरोप पर जयप्रकाश अग्रवाल खामोश

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Thursday, December 12, 2013-5:25 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): दिल्ली विधानसभा के चुनाव में बुरी तरह से हुई हार से परेशान दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष व सांसद जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा है कि पार्टी हार के कारणों का गंभीरता से विश्लेषण करेगी। उन्होंने शीला दीक्षित द्वारा की गई आलोचना पर कुछ भी जवाब देने से साफ मना कर दिया।

शीला दीक्षित ने आरोप लगाया है कि चुनाव में प्रदेश संगठन ने पूरे उत्साह से साथ सहयोग नहीं दिया।  अग्रवाल के बारे में कहा जाता है कि उनके शीला दीक्षित के साथ कभी अच्छे रिश्ते नहीं रहे। यह सर्वविदित है कि शीला दीक्षित और अग्रवाल के बीच शुरू से ही 36 का आंकड़ा रहा है।

विधायकों के कामकाज को लेकर पार्टी द्वारा कराये गये सर्वे में कुछ विधायकों को टिकट देने के मुद्दे पर शीला और अग्रवाल के बीच खींचतान खुलकर देखने को मिली थी। उसके बाद 12 विवादास्पद विधायकों को टिकट दिलाने के लिए शीला उन विधायकों को लेकर अग्रवाल के घर ले गई थी।

 अग्रवाल ने कहा कि चुनाव में हुई हार पूरी तरह से अप्रत्याशित है जिसकी पार्टी द्वारा पूरी तरह से जांच की जाएगी। शीला द्वारा लगाये गये आरोप के बारे पूछे जाने पर अध्यक्ष ने कहा कि शीला दीक्षित  पार्टी की वरिष्ठ व सम्मानित नेता हैं।

चुनाव में हुई हार के कारण बताते हुए शीला ने कहा था कि पार्टी सक्रिय नहीं थी। पार्टी और दिल्ली में सरकार के बीच समन्वय की कमी थी। दूसरी ओर शीला दीक्षित द्वारा संगठन पर लगाये गये इस आरोप का प्रदेश कांग्रेस के कई नेता जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि दीक्षित को यह बताना चाहिए कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किस नेता से सम्पर्क किया और किसने उनके आदेश को पूरा नहीं किया।

नेताओं का कहना है कि सच्चाई तो यह है कि शीला दीक्षित की हठधर्मिता की वजह से ही दिल्ली में पार्टी का आज ये हाल हुआ है। यदि पार्टी के विधायकों को पुन: टिकट दिये जाने के मुद्दे पर गंभीरता से निर्णय लिया गया होता और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देशों का पालन किया गया होता, तो चुनाव में कांग्रेस को इतनी बुरी हार का सामना नहीं करना पड़ता।

राहुल गांधी ने टिकट वितरण करने से पहले ही कहा कि इस चुनाव में दलबदल या किसी भी दागी व्यक्ति को पार्टी का उम्मीदवार नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन के कार्यकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि जब मंगोलपुरी और दक्षिणपुरी में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चुनावी रैली आयोजित की गई थी, उनमें आम जनता की उदासीनता साफतौर पर देखने को मिली थी।


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