संसद पर हमले की 12वीं बरसी आज, नेताओं ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि

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Friday, December 13, 2013-12:08 PM

नई दिल्ली: संसद पर आज ही के दिन 13 दिसंबर, 2001 को आतंकी हमला हुआ था। आज संसद पर हमले की 12वीं बरसी है। 13 दिसंबर, 2001 को  पांच आतंकवादी सफेद एंबेसडर कार में आए और 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े भवन को गोलियों से छलनी कर गए। 12 साल पहले हुए इस आतंकी हमले ने पूरे भारत को हिला कर रख दिया था और सोच में डाल दिया था कि जब लोकतंत्र का मंदिर ही सुरक्षित नहीं तो अन्य जगहों की तो कोई गारंटी ही नहीं।

 

आज संसद शुरू होने से पहले लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस उपाध्य राहुल गांधी और भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभापति हामिद अंसारी ने संसद पर हमले के 12वीं बरसी का उल्लेख करते हुए अपना सर्वो"ा बलिदान देने वाले सुरक्षा कर्मियों तथा अन्य लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। 13 दिसंबर, 2001 की सुबह हुए उस आतंकी हमले को याद कर आज भी शरीर में एक सिरहन दौड़ पड़ती चाहे वक्त हर जख्म भर देता है लेकिन उसके निशान पूरी जिदंगी के लिए रह जाते हैं।

पेश हैं संसद पर हमले की पूरी कहानी:


13 दिसंबर, 2001- 13 दिसंबर, 2001 सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर संसद के शीतकालीन सत्र चल रहा था। हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्रवाई 40 मिनट के लिए स्थगित की गई थी और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, विपक्ष की नेता सोनिया गांधी लोकसभा से निकल कर अपने-अपने सरकारी निवास के लिए निकल गए थे। लेकिन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी अपने कई साथी मंत्रियों और लगभग 200 सांसदों के साथ लोकसभा में ही मौजूद थे। लोकसभा परिसर में मीडिया का भी काफी जमावड़ा मौजूद था।

सुबह 11 बजकर 29 मिनट गेट नंबर 11, संसद भवन

उपराष्ट्रपति कृष्णकांत शर्मा के सुरक्षाकर्मी सदन से बाहर उनके आने का इंतज़ार कर रहे थे कि ठीक उसी समय  एक सफेद एंबेस्डर कार तेज़ी से उप राष्ट्रपति के काफिले की तरफ बढ़ी जिसकी रफ्तार काफी तेज थी। वहां उपस्थित सुरक्षा कर्मचारी कुछ समझ पाते इससे पहले ही लोकसभा के सुरक्षा कर्मचारी जगदीश यादव भागते नजर आए और कार को रूकने का इशारा किया लेकिन कार के नहीं रूकने पर उपराष्ट्रपति कृष्णकांत शर्मा के सुरक्षाकर्मी भी कार की तरफ दौड़े लेकिन कार रोकने की जगह गेट नंबर एक की तरफ मुड़ी और  उपराष्ट्रपति की कार से जा टकराई।

सुबह 11 बजकर 30 मिनट गेट नंबर 1, संसद भवन


इससे पहले की कोई सुरक्षा कर्मचारी पोजीशन ले पाता एंबेस्डर के चारों दरवाजे एक साथ खुले और गाड़ी में बैठे पांचों आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पांचों आतंकवादियों के पास  एके-47 थी। पूरा संसद भवन गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। आतंकवादियों के पहले हमले का शिकार बने वे चार सुरक्षाकर्मी जो एंबेस्डर कार के पीछे दौड़ रहे थे और उसे रोकने का प्रयास कर रहे थे तभी धमाकों की आवाज ने सभी को दहला दिया तभी सभी को समझ आया कि संसद पर आतंकी हमला हुआ है फिर तो जिसे जो कोना मिला सभी उस तरफ दौड़ा।

 

गोलीबारी से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर मौजूद गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज समेत तमाम वरिष्ठ मंत्रियों को फौरन सदन के अंदर ही महफूज जगहों पर ले जाया गया और सदन के अंदर जाने वाले तमाम दरवाजे भी बंद कर दिए गए और सुरक्षाकर्मियों ने अब अपनी पोजीशन संभाल ली थी। वहीं आतंकी सदन के अंदर घुसने के प्रयास में थे लेकिन सुरक्षा कर्मियों की पोजीशन ने ऐसा होने नहीं दिया और  गेट नंबर 1 की तरफ गोलियां बरसाते आतंकी को सुरक्षाबलों की गोली लग गई और वह वहीं ढेर हो गया। इससे पहले कि सुरक्षाकर्मी उसके पास जाते और उसकी चैकिंग करते उसने अपनी पीठ से बंधे बम से खुद को उड़ा लिया।

 

चार आतंकी अब भी जिंदा थे और अंधाधुंध गोलियां चला रहे थे। वहीं  एनएसजी कमांडो और सेना को भी हमले की खबर दी जा चुकी थी और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम भी संसद भवन के लिए कूच कर चुकी थी लेकिन तब तक संसद भवन में लाइव ऑपरेशन जारी था और देश-विदेश में हमले की खबरे फैल चुकी थीं। दूसरी तरफ अपने साथी की मौत के कारण आतंकी थोड़ा घबरा भी गए थे लेकन अब वे चारों तरफ से सुरक्षाकर्मचारियों से घिर चुके थे और इसी के चलते एक और आतंकी ढेर हो चुका था।

दिन के करीब 12.10 बजे गेट नंबर 9, संसद भवन

आतंकी अब गेट नंबर 9 के पास आ गए थे और सदन के अंदर घुसने की कोशिश में थे लेकिन पूरा ऑपरेशन गेट नंबर 9 के पास सिमट गया। दोनों तरफ से लगातार गोलियां चल रही थीं. बीच-बीच में आतंकवादी सुरक्षाकर्मियों पर हथगोले भी फेंक रहे थे लेकिन वे चारों तरफ से घिर चुके थे लिहाजा अब बचने का कोई रास्ता नहीं था और आखिरकार कुछ देर बाद एक-एक कर तीनों आतंकवादी भी ढेर कर दिए गए। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों ने सूझ-बूझ से आतंकवादियों के एक बहुत बड़े मिशन को नाकाम किया। इस आतंकवादी हमले में दिल्ली पुलिस के पांच जवान,संसदीय सुरक्षा से जुड़े दो सुरक्षाकर्मी, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस का एक जवान, एक माली और एक कैमरामैन मारे गए थे।


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