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पत्रकार व क्लर्क को नहीं मिली जमानत, भेजा जेल

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Friday, December 13, 2013-5:01 PM

नई दिल्ली : अपने एक कर्मचारी को जातिसूचक शब्द कहने के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने एक समाचार एजेंसी के संयुक्त संपादक,एक पत्रकार व एक क्लर्क को जमानत देने से इंकार करते हुए इन तीनों को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दया प्रकाश ने आरोपी संयुक्त संपादक नीरज बाजपेयी,क्लर्क मोहन लाल जोशी व पत्रकार अशोक उपाध्याय को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि मामला गंभीर है। आरोप पत्र दायर हो चुका है, जिसमें शिकायकत्र्ता व 2 गवाहों के बयान से आरोप की गंभीरता जाहिर हो रही है।

न्यायाधीश ने कहा कि उनको जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता  है क्योंकि वह मामले की सुनवाई को प्रभावित कर सकते हैं। इस मामले में तीनों आरोपियों की तरफ से जमानत दिए जाने की मांग करते हुए दलील दी गई थी कि मामले में जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दायर हो चुका है न ही उनको मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया।

 शिकायतकत्र्ता घटना के समय वहां पर मौजूद नहीं था। ऐसे में उसके द्वारा लगाए गए आरोप निराधार है। वहीं सरकारी वकील ने दलील दी कि मामले के जांच अधिकारी ने जानबूझकर जांच के दौरान आरोपियों को नहीं पकड़ा था। मामला गंभीर है।

 इस मामले में संसद मार्ग थाने में केस दर्ज कराया गया था। घटना 14 मार्च 2013 की है। शिकायकत्र्ता कर्मचारी की शिकायत पर पुलिस ने दलित उत्पीडऩ अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।

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