करजई से वार्ता में द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते का मुद्दा उठा

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Friday, December 13, 2013-11:04 PM

नई दिल्ली: अगले साल सैनिकों को हटाने की अमेरिकी योजना के मद्देनजर समझा जा रहा है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने आज भारत पर इस बात को लेकर दबाव डाला कि वह घातक और गैर घातक हथियारों सहित सैन्य सहायता को बढ़ाए। साथ ही, इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अफगान नेता की मांग के खिलाफ नहीं है जिसे देश की क्षमता के अनुसार पूरा किया जा सकता है।

चार दिनों की आधिकारिक यात्रा पर आए करजई ने यहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने सिंह को अफगानिस्तान के सुरक्षा हालात से अवगत कराया। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी करजई से मुलकात की। अधिकारियों के मुताबिक दो बड़े मुद्दों सहित विभिन्न चीजों को यहां ध्यान में रखकर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक हमारी क्षमता अपने पास उपलब्ध अतिरिक्त सामग्री और अन्य देशों से लाइसेंसिंग पर आधारित है। जैसे कि भारत को यदि एक रूसी टैंक की आपूर्ति करनी है तो उसे ऐसा करने के लिए रूस से इजाजत और लाइसेंस लेने की जरूरत होगी।

करजई के साथ बैठक के दौरान सिंह ने अफगान-अमेरिका द्विपक्षीय सुरक्षा समझौता (बीएसए) के मुद्दे को उठाया। यह उम्मीद जताई गई कि भारत एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए उसे राजी कर सकता है जिससे अमेरिका 2014 के बाद भी अपने सैनिक रख सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यहां बताया, ‘‘हां। इस पर:बीएसए: चर्चा हुई क्योंकि हमें लगता है कि हमारा भविष्य जुड़ा हुआ है। भारत और अफगानिस्तान दोनों ही देश बीएसए को अफगानिस्तान में स्थिरता और सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं।’’


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